कंगना को हिमाचल की महिला विधायकों की संख्या तक नहीं मालूम :विक्रमादित्य सिंह

 


शिमला, 18 अप्रैल (हि.स.)। लोकसभा चुनाव में मंडी संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद कंगना रनौत के खिलाफ चुनाव लड़ चुके और हार का सामना कर चुके हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने महिला आरक्षण बिल को लेकर उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

विक्रमादित्य सिंह ने शनिवार को शिमला में कहा कि कंगना रनौत ने यह बयान दिया कि हिमाचल प्रदेश में केवल एक ही महिला विधायक है, जबकि यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह हास्यास्पद है कि संसद में महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले लोगों को यह तक जानकारी नहीं है कि प्रदेश में कितनी महिला विधायक हैं। दरअसल, हिमाचल में 3 महिला विधायक हैं, जिनमें दो कांग्रेस और एक भाजपा की हैं।

महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पारित नहीं हो पाने के बाद अब इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के पूरी तरह पक्ष में है, लेकिन भाजपा सरकार महिलाओं के नाम पर डीलिमिटेशन का मुद्दा साथ जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा कि इसी कारण विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इस बिल का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तीन अलग-अलग बिल एक साथ लेकर आई थी, जिनमें राज्यों का डीलिमिटेशन, केंद्र शासित प्रदेशों का डीलिमिटेशन और महिला आरक्षण बिल शामिल था। उनके अनुसार महिला सशक्तिकरण की आड़ में देश की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यदि 2023 में लाए गए महिला आरक्षण बिल को 545 सीटों के मौजूदा आधार पर 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ पारित किया जाए, तो सभी राजनीतिक दल इसका समर्थन करेंगे। लेकिन सरकार की मंशा राजनीतिक इच्छाओं को साधने की थी, इसलिए संयुक्त विपक्ष ने इसका विरोध किया।

विक्रमादित्य सिंह ने यह भी कहा कि 1971 की जनगणना को आधार बनाकर सीटों का पुनर्निर्धारण करने की स्थिति में उत्तर भारत की सीटों की संख्या दक्षिण भारत के मुकाबले काफी बढ़ सकती थी, जिससे उन राज्यों को नुकसान होता जिन्होंने परिवार नियोजन और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से पेश किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल, असम और केरल जैसे राज्यों में चुनावी माहौल के बीच विशेष सत्र में इस बिल को लाना भी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था, जबकि सरकार को पहले से पता था कि इसे पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत उपलब्ध नहीं है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी सदन के भीतर अपनी बात रखी है।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण के साथ मजबूती से खड़ी है, लेकिन महिलाओं के नाम पर देश की जनसांख्यिकी बदलने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन इसे राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर नहीं लाया जाना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा