पांगणा की महिलाओं का श्रमदान: सेवा, संस्कार और सामाजिक जागरण का सबसे बड़ा प्रेरक अभियान

 


मंडी, 02 जुलाई (हि.स.)। ऐतिहासिक नगरी पांगणा की महिलाओं ने स्थानीय प्राथमिक पाठशाला के प्रांगण में खेल मैदान के निर्माण का संकल्प लिया गया। इस संकल्प को साकार करने में गांव की मातृशक्ति ने जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह अनुकरणीय है। इतिहास साक्षी है कि समाज का वास्तविक परिवर्तन सत्ता या संपत्ति से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और श्रमदान से हुआ है। मनुष्य जीवन की भागदौड़ में अपने भीतर के बालभाव को कहीं खो देता है, जबकि बच्चों की सहज मुस्कान ही जीवन में नवचेतना का संचार करती है। इसी पवित्र भावना को साकार करने के लिए हाथों में फावड़ा और तसला उठाकर जब महिलाएं श्रमदान के लिए मैदान में उतरीं। उन्होंने केवल मिट्टी नहीं समतल की, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की नई इबारत लिख दी। एक बार ही नहीं अपितु अनेक बार किया गया।

यह श्रमदान केवल एक खेल मैदान का निर्माण नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने का सामूहिक प्रयास था। महिलाओं ने अपने श्रम से यह संदेश दिया कि समाज की सबसे बड़ी शक्ति धन नहीं, बल्कि जागृत जनशक्ति और मातृशक्ति है। जहां महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व करती हैं, वहां विकास केवल दिखाई नहीं देता, बल्कि पीढ़ियों तक महसूस किया जाता है।

स्थानीय निवासी एवं समाजसेवी जगदीश शर्मा का कहना है कि आज आवश्यकता है कि प्रत्येक गाँव, प्रत्येक मोहल्ला और प्रत्येक विद्यालय ऐसे श्रमदान अभियानों को जनआंदोलन का स्वरूप दे। जब समाज स्वयं अपने बच्चों के लिए आगे आएगा, तभी सेवा संस्कार बनेगी, संस्कार संस्कृति बनेंगे और संस्कृति राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बनेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा