हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह के नाम पर नया दल बनाने की कवायद, प्रतिभा सिंह ने मांगी रोक
शिमला, 07 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल की सियासत में दिवंगत वीरभद्र सिंह के नाम और विरासत को लेकर नया विवाद सामने आया है। उनकी पत्नी, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मंडी लोकसभा क्षेत्र से सांसद रही प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग से कहा है कि उनके पति के नाम, पहचान और राजनीतिक विरासत से मिलते-जुलते नामों पर किसी नए राजनीतिक दल का पंजीकरण न किया जाए। उन्होंने आयोग को लिखे पत्र में ‘राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस’ और ‘वीर कांग्रेस’ जैसे नामों का उल्लेख करते हुए कहा है कि उन्होंने या उनके परिवार के किसी सदस्य ने ऐसे किसी दल के गठन की अनुमति नहीं दी है।
प्रतिभा सिंह ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भेजे पत्र में कहा है कि समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें ऐसे प्रयासों की जानकारी मिली है। उनके अनुसार कुछ लोग वीरभद्र सिंह के नाम और उनकी गुडविल यानी जनस्वीकृति का इस्तेमाल कर नया राजनीतिक दल बनाने की बात कर रहे हैं।
उन्होंने आयोग से अनुरोध किया है कि ‘राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस’, ‘वीर कांग्रेस’ या इसी तरह के किसी भी नाम से राजनीतिक दल के गठन या पंजीकरण को मंजूरी नहीं दी जाए, जिसमें वीरभद्र सिंह के नाम का इस्तेमाल होता हो। उन्होंने कहा है कि किसी व्यक्ति को नया राजनीतिक दल बनाने की स्वतंत्रता पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनके दिवंगत पति के नाम और उनकी लोकप्रियता का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना स्वीकार्य नहीं है।
‘राजा’, ‘बुशहर’ और ‘राजा बुशहर’ नाम भी पत्र में उठे
प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में केवल ‘वीरभद्र’ नाम वाले प्रस्तावित दलों का ही उल्लेख नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि उनके संज्ञान में ऐसे प्रयास भी आए हैं, जिनमें ‘राजा’, ‘बुशहर’ और ‘राजा बुशहर’ जैसे नामों का इस्तेमाल कर नए राजनीतिक दल बनाने की कोशिश की जा रही है।
पत्र में उन्होंने कहा है कि ये नाम वीरभद्र सिंह के नाम और उनकी विरासत से करीबी तौर पर जुड़े हैं। वीरभद्र सिंह हिमाचल की तत्कालीन बुशहर रियासत से संबंधित थे। प्रतिभा सिंह ने इन नामों के इस्तेमाल को लेकर भी चुनाव आयोग से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
2027 के चुनाव से पहले नाम के इस्तेमाल पर आपत्ति
प्रतिभा सिंह ने अपने पत्र में हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा है कि वीरभद्र सिंह आज भी प्रदेश के लोगों के बीच सम्मान और स्नेह रखते हैं तथा राज्य के हर हिस्से में उनका बड़ा जनसमर्थन रहा है। ऐसे में उनके नाम और गुडविल का इस्तेमाल कर किसी नए राजनीतिक दल के गठन से लोगों को भ्रमित किए जाने की आशंका है।
उन्होंने चुनाव आयोग से कहा है कि इस मामले में कार्रवाई की जाए और वर्तमान ही नहीं, भविष्य में भी वीरभद्र सिंह के नाम या उनसे मिलते-जुलते नाम का इस्तेमाल करने वाले किसी राजनीतिक दल के आवेदन को मंजूरी देने से पहले उनकी आपत्ति पर विचार किया जाए।
किसी व्यक्ति के दल बनाने पर आपत्ति नहीं, नाम के इस्तेमाल पर सवाल
प्रतिभा सिंह ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें किसी व्यक्ति के राजनीतिक दल बनाने के अधिकार पर आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि आपत्ति केवल वीरभद्र सिंह के नाम और उनकी राजनीतिक पहचान के इस्तेमाल को लेकर है। उन्होंने कहा है कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने ऐसे किसी राजनीतिक दल के गठन के लिए सहमति दी है।
उन्होंने आयोग से यह भी अनुरोध किया है कि वीरभद्र सिंह के नाम से जुड़े किसी भी ऐसे आवेदन पर निर्णय लेने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
वीरभद्र की विरासत से जुड़ा है परिवार का राजनीतिक सफर
दिवंगत वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे। उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय तक रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी रही। रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र के आरक्षित होने के बाद वर्ष 2012 में उन्होंने शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। वह केंद्र सरकार में भी कैबिनेट मंत्री और अन्य मंत्री पदों पर रहे। उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वहीं, प्रतिभा सिंह पूर्व में लोकसभा सांसद के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा