ज्येष्ठ मंगलवार को मां के दर उमड़ा भक्तों का सैलाब

 

ऊना, 18 अगस्त (हि.स.)। विश्वविख्यात शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी के पावन दरबार में चल रहे श्रावण अष्टमी मेले के छठे दिन और ज्येष्ठ मंगलवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। माता के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं की डबल लाइन लुधियाना धर्मशाला तक पहुंच गई। मेले के छठे दिन तक माता के दरबार में अनुमानित दो लाख से अधिक श्रद्धालु हाजिरी भर चुके हैं।

प्रशासन के मुताबिक वीरवार को मुख्य 'श्रावण अष्टमी' मनाई जाएगी, जिसके चलते आगामी दो दिनों में एक लाख से अधिक और श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। अष्टमी के इस मुख्य पर्व के बाद मेला धीरे-धीरे समापन की ओर बढ़ेगा। भीड़ के इस भारी दबाव के बावजूद मंदिर प्रशासन की सख्ती और मुस्तैदी के चलते व्यवस्था में काफी सुधार देखने को मिला। सुरक्षा और कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए तलवाड़ा बाईपास पर भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। जिससे चलते मंदिर मुख्य मार्ग में वाहनों की आवाजाही वि जाम की स्थिति से निपटा जा सके। इसी तरह श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा प्रदान करने हेतु गेट नंबर-1 से लेकर ओल्ड बस स्टैंड तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और स्पेशल वेरी गेट लगाकर श्रद्धालुओं को कतारों में रहकर दर्शन करने की अपील की जा रही है ।

मेला ड्यूटी में तैनात पुलिस,होमगार्ड के जवान व मंदिर के एक्स सर्विसमैन जवानों द्वारा गेट नंबर एक से लेकर पुराने बस स्टैंड तक मोर्चा संभाला गया है जहां पर अक्सर श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ रहती है। प्रशासन द्वारा इस बार गेट नंबर 1 और 2 से श्रद्धालुओं को जूते पहनकर एंट्री न करने के सख्त आदेश दिए गए हैं, जिससे शुरुआत में कुछ श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। मंदिर न्यास द्वारा इस बार ओल्ड बस स्टैंड में एक बड़ा जूता घर बनाया गया है। इससे पहले व्यवस्था यह थी कि श्रद्धालु जिस दुकान से प्रसाद लेते थे, वहीं अपने जूते छोड़ देते थे। दर्शन करने के बाद भीड़ के बीच जब श्रद्धालु वापस दुकानों की तरफ जूते लेने जाते थे, तो पूरी कतार प्रभावित होती थी और व्यवस्था बिगड़ जाती थी। इसी अव्यवस्था को रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार यह कड़ा फैसला लिया है।

मंदिर पुजारी एवं पुजारी बारीदार सभा के प्रधान रविंद छिन्दा ने बताया कि श्रावण अष्टमी की सातवें रात्रि दिवस पर माता चिंतपूर्णी जी की विशेष रात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस रात को लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां चिंतपूर्णी जी के दरबार में पहुंचते हैं। ब्रह्मांड की सभी

देवियां अपनी छोटी बहन चिंतपूर्णी से मिलने यहां पहुंचती हैं । चिंतपूर्णी जी के दरबार में उपस्थित श्रद्धालु इस दिव्य दिव्या ज्योति के रूप में मां के दर्शन प्राप्त करते हैं। यह रात बहुत ही शुभ रात्रि होती है और इस रात्रि में भाग्यशाली श्रद्धालुओं को मां की दिव्य ज्योति के दर्शन होते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल