जब चुनाव कांग्रेस के पक्ष में होते हैं तो ईवीएम ठीक, परिणाम खिलाफ आए तो खिलाफ : वीरेंद्र कंवर

 


ऊना, 08 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में कांग्रेस द्वारा ऊना में किए गए धरना-प्रदर्शन पर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता वीरेंद्र कंवर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले अपने पुराने रुख और वर्तमान विरोध के बीच का विरोधाभास जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए।

ऊना में भाजपा कार्यकर्ताओं व स्थानीय लोगों से संवाद करने के उपरांत वीरेंद्र कंवर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2003 के विधानसभा चुनावों में सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदान ईवीएम के माध्यम से हुआ था। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस को चुनावी परिणाम अपने पक्ष में नहीं मिले तो ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए, लेकिन समय के साथ ये आरोप बेबुनियाद साबित हुए। आज जब एसआईआर जैसी प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूचियों को अधिक व्यवस्थित और सत्यापित करने की बात हो रही है, तो कांग्रेस फिर सवाल खड़े कर रही है।

उन्होंने कहा कांग्रेस को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि यदि उसे चुनावी प्रक्रिया पर इतना ही अविश्वास है, तो वह उन चुनावों के परिणामों को कैसे स्वीकार करती रही, जिनमें ईवीएम का इस्तेमाल हुआ था। कंवर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल आरोप लगाने की राजनीति कर रही है। उनके अनुसार जब चुनावी परिणाम कांग्रेस के अनुकूल नहीं आते हैं तो वह कभी ईवीएम, कभी निर्वाचन आयोग और अब एसआईआर पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की राजनीतिक बौखलाहट को दर्शाता है।

पूर्व मंत्री ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में जनता महंगाई, बेरोजगारी, विकास कार्यों की धीमी गति और अन्य स्थानीय मुद्दों को लेकर परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर जवाब देने के बजाय कांग्रेस ऐसे प्रदर्शनों के माध्यम से जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रही है।

कंवर ने कहा कि कांग्रेस को आरोपों और प्रदर्शनों की राजनीति छोड़कर जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए। लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुचिता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सभी राजनीतिक दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार या मतदाता सूचियों के सत्यापन को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय सभी दलों को तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल