खिलाड़ियों पर चला प्रशासन का चाबुक, इंडोर में खेलने की फीस 150 से बढ़ाकर 1000 की
ऊना, 05 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के ऊना में खेल के मैदान अब बच्चों के लिए पहले जैसे आसान नहीं रहे। जिन इंडोर स्टेडियमों से कभी उभरते खिलाडिय़ों के सपनों को उड़ान मिलती थी, वहीं अब बढ़ी हुई फीस ने कई परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। खेल के प्रति उत्साह और भविष्य में मेडल जीतने के सपनों के बीच अब आर्थिक बाधा खड़ी होती नजर आ रही है।
देश में जब भी ओलंपिक या अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की बात होती है, तो हर कोई चाहता है कि हमारे खिलाड़ी पदक जीतकर देश का नाम रोशन करें। लेकिन इन बड़े सपनों की नींव छोटे शहरों और कस्बों के उन्हीं मैदानों पर रखी जाती है, जहां बच्चे अपने खेल की शुरुआत करते हैं।
ऊना का इंडोर स्टेडियम भी लंबे समय से ऐसे ही खिलाडिय़ों की पौध तैयार करने का केंद्र रहा है। हालांकि अब यहां खेलना पहले जितना आसान नहीं रह गया है।
हाल ही में इंडोर स्टेडियम की फीस में तीन गुणा बढ़ोतरी की गई है। स्कूली बच्चों के लिए 150 रुपए की फीस अब बढ़ाकर 500 रुपए कर दी गई है, जबकि बाहरी खिलाडिय़ों को 450 की जगह 1000 रुपए चुकाने पड़ेंगे। इस बदलाव ने खासतौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को प्रभावित किया है। जिन बच्चों के लिए यह स्टेडियम रोजाना की दिनचर्या का हिस्सा था, उनके लिए अब यहां नियमित अभ्यास करना चुनौती बनता जा रहा है।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई, कोचिंग और अन्य जरूरतों के बीच पहले ही खर्च का दबाव रहता है। ऐसे में खेलों के लिए इतनी अधिक फीस देना हर किसी के लिए संभव नहीं है। कई परिवार अब इस दुविधा में हैं कि बच्चों के खेल को जारी रखें या आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता दें। खिलाडिय़ों के लिए यह केवल फीस बढऩे का मामला नहीं, बल्कि उनके सपनों से जुड़ा मुद्दा है। खेल के शुरुआती दौर में ही यदि आर्थिक अड़चनें सामने आ जाएं, तो कई प्रतिभाएं आगे बढऩे से पहले ही पीछे छूट जाती हैं। छोटे शहरों में ऐसे इंडोर स्टेडियम ही वह जगह होते हैं, जहां बच्चों को सही प्रशिक्षण और मंच मिलता है। खेल विभाग का तर्क है कि स्टेडियम का हाल ही में कायाकल्प किया गया है और सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि इन सुविधाओं का लाभ तभी सार्थक होगा, जब खिलाड़ी आसानी से यहां तक पहुंच सकें। यदि फीस ही इतनी अधिक हो जाए कि बच्चे मैदान तक न पहुंच पाएं, तो सुविधाएं भी अधूरी साबित होंगी।
खिलाड़ी करेंगे खेल का बहिष्कार
इंडोर स्टेडियम में खेलने आने वाले खिलाडिय़ों ने फीस बढ़ाने के निर्णय को गैर जरुरी करार दिया। खिलाडिय़ों का कहना है कि वह इतना भारी भरकम फीस अदा नहीं कर सकते है। इससे बेहतर है कि वह खेलना ही छोड़ दें।
इस बारे में कार्यकारी जिला खेल अधिकारी प्रिंस पठानिया का कहना है कि इंडोर स्टेडियम की करीब 65 लाख रुपए की लागत से मुरम्मत करवाई गई है। इसी के चलते स्टेडियम की फीस में इजाफा किया गया है। स्कूल के बच्चों से 500 रुपए व बाहरी खिलाडिय़ों से 1000 रुपए फीस ली जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल