जो जागा सो परम सुभागा, बिना सुमिरण के नहीं होती आत्मिक जागृति : स्वामी विशेषानंद
ऊना, 28 जुलाई (हि.स.)। हरोली उपमंडल के गांव पोलिया के समीप स्थित अन्नपूर्णा मंदिर में गुरु पूजा व्यास पूर्णिमा के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय सत्संग समारोह का मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में शुभारंभ हुआ। समारोह में माहिलपुर स्थित अलख अमर विवेचन प्रत्यक्षालय से पधारे स्वामी विशेषानंद जी महाराज ने अपने आत्मानुभवमयी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल प्रभात फेरी से हुआ। प्रभात फेरी अन्नपूर्णा मंदिर से शुरू होकर आसपास के विभिन्न मोहल्लों से गुजरते हुए सत्संदेश का प्रसार करती हुई पुनः मंदिर परिसर में संपन्न हुई।
दोपहर के भोजन के उपरांत आयोजित सायंकालीन सत्संग में छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने भक्ति-भाव से ओतप्रोत भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके बाद स्वामी विशेषानंद जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि महापुरुषों की दृष्टि में संसार में दो प्रकार के लोग होते हैं—जागृत और सुषुप्त। उन्होंने कहा कि वास्तव में जागृत वही है, जिस पर परमात्मा की विशेष कृपा होती है और जिसे किसी पूर्ण सद्गुरु का सानिध्य प्राप्त होकर जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध हो जाता है।
उन्होंने कहा, जो जागा सो परम सुभागा। बिना जागे, बिना ध्यानस्थ हुए और बिना सुमिरण के परमात्मा की रजा में स्थिर रहना संभव नहीं है। हरि चर्चा और नाम सुमिरण ही आत्मिक जागृति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
सत्संग समारोह में क्षेत्र के श्रद्धालुओं के अलावा दूर-दराज़ से आए भक्तों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर संतवाणी का श्रवण किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल