संजौली में ट्विन टनल के विरोध में 16 अक्टूबर को रोष रैली, निर्माण बंद करने की मांग

 


शिमला, 11 अक्टूबर (हि.स.)। राजधानी शिमला के संजौली में प्रस्तावित ट्विन टनल के विरोध में 16 अक्टूबर को रोष रैली निकाली जाएगी। ट्विन टनल प्रभावित संयुक्त संघर्ष समिति और शिमला नागरिक सभा ने रविवार को संजौली में हुई संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया। दोनों संगठनों ने टनल निर्माण तत्काल बंद करने और प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा पारदर्शी जनसुनवाई करवाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।

बैठक में पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि संजौली हिमालय की संवेदनशील पहाड़ियों में स्थित है। क्षेत्र में पहले से ही निर्माण कार्य हो रहे हैं। ऐसे में टनल निर्माण से लोगों की जान-माल और पर्यावरण को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को विश्वास में नहीं लिया गया और नियमानुसार पारदर्शी जनसुनवाई भी नहीं की गई।

बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि फोरलेन निर्माण के दौरान कंपनियों की कथित अवैज्ञानिक कटिंग और खुदाई से चमियाणा, मटू कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों में मकानों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। प्रभावित लोगों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया।

संघर्ष समिति और नागरिक सभा के प्रतिनिधियों ने कहा कि ट्विन टनल का मामला केवल शांति विहार और भट्टाकुफर तक सीमित नहीं है। इसका संभावित खतरा पूरे संजौली क्षेत्र पर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि मकानों में दरारें आने और खतरे की आशंका के कारण किरायेदारों के कमरे खाली करने से स्थानीय कारोबार और मकान मालिकों की किराये से होने वाली आय भी प्रभावित हो रही है।

वक्ताओं ने जोशीमठ में भू-धंसाव से हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए कहा कि संजौली में ऐसी स्थिति पैदा होने से रोकना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बैठक में तय किया गया कि 16 अक्टूबर की रैली गैर-राजनीतिक होगी। आयोजकों ने धर्म, जाति और राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर सभी नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की। उनके अनुसार, यह प्रदर्शन संजौली को बचाने के लिए व्यापक जनआंदोलन की शुरुआत होगा।

संघर्ष समिति और शिमला नागरिक सभा ने मांग की कि प्रस्तावित ट्विन टनल का निर्माण तत्काल पूरी तरह बंद किया जाए। प्रभावित क्षेत्रों का सरकारी और मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ संस्थाओं से सर्वेक्षण करवाया जाए। प्रशासन की ओर से की जा रही जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और प्रभावित क्षेत्रों में नियमानुसार पारदर्शी जनसुनवाई दोबारा करवाई जाए। जिन लोगों के मकान गिर गए हैं या उनमें दरारें आई हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा