आईआईटी द्वारा माइंड ट्री स्कूल का एग्रीमेंट रद्द करने पर तनातनी, मामला हाई कोर्ट पहुंचा
मंडी, 04 अप्रैल (हि.स.)। आईआईटी कैंपस में चल रहे माइंड ट्री स्कूल का एग्रीमेंट रद्द करने का मामला अब तुल पकड़ने लगा है। स्कूल के छात्रों के भविष्य को लेकर माइंड ट्री स्कूल प्रबंधन ने मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया है। माइंड ट्री शिक्षण संस्थान के संचालक हृदेयश मदान का कहना है कि माइंड ट्री स्कूल वर्ष 2017 से आईआईटी मंडी के सालगी कैंपस में चल रहा है। उसी साल आईआईटी मंडी ने समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर एक अच्छे शिक्षण संस्थान से सीबीएससई से जुड़ा स्कूल खोलने के लिए प्रस्ताव मांगे थे।
उन्होंने बताया कि सभी औपचारिक्ताओं व मंजुरियों के बाद, आईआईटी मंडी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अनुमति से स्कूल शुरू हुआ और 33 साल की बिल्डिंग लीज़ पर समझौता हुआ। लेकिन साजिश के तहत संस्थान को आर्थक रूप से कमजाेर करने की कोशिश की गई और अंत में 33 साल की बिल्डिंग लीज को एक झटके में रद्द कर दिया गया। जिससे स्कूल में पढ़ रहे नौंवीं से जमा दो कक्षाओं के छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया गया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से 2022 तक सब कुछ ठीक चलता रहा। लेकिन वर्ष 2022 में नई स्कूल मैनेजिंग कमेटी एसएमसी बनने के बाद समस्याएं शुरू हुईं है। उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार एसएमसी की भूमिका सलाह देने की होती है, लेकिन आईआईटी मंडी के कुछ सदस्यों ने रोज़मर्रा के कामों में दखल देना शुरू कर दिया। उन्होंने हम पर ऐसे फैसले मानने का दबाव डाला, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता था। हमने शिक्षा के स्तर से समझौता करने से मना कर दिया।
इसके बाद बदले की भावना से ग्रसित होकर माइंड ट्री सकूल प्रबंधन के समक्ष आर्थिक परेशानियां खड़ी की गई। खाली जगहों पर भी किराया छह गुणा तक बढ़ा दिया गया, गलत तरीके से जीएसटी की मांग की गई जो ट्रस्ट पर लागू नहीं होता, और कई बेवजह के मुद्दे उठाए गए।
इसके पश्चात 6 मई 2024 को आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार ने बिना कोई कारण बताए स्कूल को बंद करने का नोटिस जारी कर दिया। यह फैसला मनमाना और न्याय के सिद्धांतों के। के खिलाफ था। हमने कई बार कारण पूछे और डायरेक्टर से मिलने की कोशिश की, लेकिन हमें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। बीते दो साल से निदेशक महोदय द्वारा मिलने का समय नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जब काफी कोशिशों करने के बाद भी समाधान नहीं निकला,तो बच्चों के भविष्य को लेकर मजबूरन हमें कोर्ट जाना पड़ा। यह मामला हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में चल रहा है, हम कानून का पालन करते हैं और उम्मीद करते हैं कि न्याय मिलेगा। जब मामला कोर्ट में है, ऐसे में आईआईटी मंडी की ओर से कोई भी एकतरफा कार्रवाई गलत और गैरकानूनी होगी। इसके बावजूद आईआईटी मंडी सार्वजनिक रूप से यह कह रहा है कि वह स्कूल अपने हाथ में लेकर मई से क्लासेस शुरू करेगा। जबकि मामला अभी कोर्ट में है, ऐसे दावे करना गलत है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर माइंड ट्री स्कूल बंद होता है और आईआईटी मंडी नया स्कूल शुरू करता है, तो कक्षा 9 से 12 सबसे सीबीएसई बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाएंगे।
उन्होंने बताया कि सीबीएसई से मान्यता लेने में कम से कम दो साल लगते हैं, जिससे इन छात्रों का भविष्य सीधे प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा कि आईआईटी मंडी ने यह भी कहा है कि अभिभावक अभी फीस न दें, किताबें और यूनिफॉर्म न खरीदें और एक महीने इंतजार करें। इससे पढ़ाई का सिलसिला टूट रहा है और छात्रों को नुक्सान हो रहा है। माइंड ट्री स्कूल हमेशा से अच्छी शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है और जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता है हम बच्चों को किताबें मुफ्त देंगे।
उन्होंने बताया कि अभी तक आईआईटी की ओर से करीब दो करोड़ की राशि जो गरीब बचचों की छात्रवृति की बनती है अदा नहीं की गई है। आईआईटी मंडी के इस मनमाने व्यवहार से दंग हैं। हमें उम्मीद है कि माननीय अदालत हमारे साथ न्याय करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा