हिमाचल में कैंसर केसों के लिए खानपान मुख्य रूप से दोषी: डॉक्टर पुनीत गुप्ता
मंडी, 24 फ़रवरी (हि.स.)। फ्रेंड्स ऑफ हिमाचल संस्था द्वारा हिमाचल में कैंसर के बढ़ते मामलों पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एशियन कैंसर हॉस्पिटल फरीदाबाद के चेयरमैन डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोग रात्रि में अपने दोस्तों के साथ सूखे रैड मीट का सेवन करते हैं और महफ़िल ज़माने के लिए सिगरेट और शराब को जोड़ लेते हैं। यह सब कैंसर फैलने के लिए एक घातक मिश्रण माना जाता है, क्योंकि इस मिश्रण में 80 ऐसे केमिकल विद्यमान होते हैं, जो कैंसर का कारण बनते हैं ।
डॉक्टर पुनीत गुप्ता मंडी के मूल निवासी हैं और देश के चोटी के कैंसर विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के सुदूर दुर्गम पिछड़े क्षेत्रों और राज्य के जन जातीय क्षेत्रों में परंपरागत रूप में सर्दियां शुरू होने से पहले बकरे-भेड़ को काटकर इसका मीट सूखा लिया जाता है और फिर सर्दियों में इस मीट का सेवन किया जाता है। कई मामलों में तो विवाह शादियों में बरसों पुराना सूखा रैड मीट परोसा जाता है, जिसे पारिवारिक प्रतिष्ठा से भी जोड़ा जाता है। दरअसल मीट सुखाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन अब यह मीट कैंसर का मुख्य कारण बन कर सामने आ रहा है ।
डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने सूखे लाल मीट के बजाय देशी बकरे के आर्गेनिक ताजे मीट के सेवन का सुझाव दिया । उन्होंने कहा की सूखे रैड मीट की जगह ताजा चिकन या ताजा मछली का सेवन सेहत के लिए बेहतर है और इसके सेवन से कैंसर का कतई खतरा नहीं होता। उन्होंने सुझाव दिया की बीयर और व्हिस्की के सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है और इसके लिए अगर आप शराब के शौक़ीन हैं तो रेड वाइन का सेवन करें । और रेड वाइन को बिना पानी मिलाए पिया जाए तो बेहतर होगा। क्योंकि ज्यादातर शराबी घर से बाहर पीते हैं जहां साफ पानी, बर्फ की उपलब्धता नहीं होती और गंदा-खराब पानी मिलाने से रेड वाइन के गुण खराब हो जाते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा