हिमाचल शिक्षक महासंघ की केंद्र से मांग, 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टैट से मिले छूट

 


शिमला, 18 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से छूट दी जाए। महासंघ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 29 मई 2026 के फैसले के बाद देशभर में लाखों शिक्षकों के भविष्य पर अनिश्चितता पैदा हो गई है और हिमाचल प्रदेश में भी 10 हजार से अधिक शिक्षकों की नौकरी प्रभावित होने का खतरा बन गया है।

शिमला में वीरवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार सूद ने कहा कि जो शिक्षक वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, उनके लिए सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचने पर TET की शर्त लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने टीईटी संबंधी अधिसूचना जारी की थी, जबकि उससे पहले नियुक्त शिक्षकों की भर्ती उस समय लागू नियमों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर हुई थी।

महासंघ का तर्क है कि बाद में लागू की गई पात्रता शर्तों को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्यायसंगत नहीं है। ऐसे शिक्षक वर्षों से विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं और उनकी नियुक्तियां उस समय की वैध भर्ती प्रक्रिया के तहत हुई थीं। इसलिए उनकी सेवा सुरक्षा पर कोई संकट नहीं आना चाहिए।

महासंघ ने केंद्र सरकार और संसद से मांग की है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। साथ ही उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सभी सेवा लाभों को पूर्ण संरक्षण दिया जाए। महासंघ ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो तो केंद्र सरकार संसद में उपयुक्त विधेयक या विशेष प्रावधान लाकर प्रभावित शिक्षकों को राहत प्रदान करे।

शिक्षक महासंघ ने केंद्र सरकार से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की है, ताकि शिक्षकों के बीच बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके। महासंघ ने बताया कि इस मांग को लेकर देशभर के जिलों से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन जिला उपायुक्तों के माध्यम से भेजे जाएंगे।

विनोद कुमार सूद ने कहा कि शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही सेवाओं, उनके अनुभव और वैध नियुक्तियों को देखते हुए सरकार को जल्द हस्तक्षेप करना चाहिए, जिससे शिक्षकों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था दोनों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा