शिमला में 15 मई से चरमरा सकती है सफाई व्यवस्था, हड़ताल पर जाएंगे सैहब कर्मी

 


शिमला, 12 मई (हि.स.)। शिमला शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले सैहब कर्मियों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। सीटू से संबंधित सैहब सोसाइटी यूनियन ने मंगलवार को सीटू कार्यालय शिमला में एक बैठक आयोजित की, जिसमें डोर टू डोर गार्बेज कलेक्टर, सुपरवाइजर, रोड स्वीपिंग स्टाफ सहित विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हुए।

बैठक में फैसला लिया गया कि अगर कर्मचारियों की दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि बहाल नहीं की गई तो 15 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। यूनियन ने कहा है कि हड़ताल के दौरान शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप्प रहेगी और कोई भी कर्मचारी काम नहीं करेगा।

इस अवसर पर सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने नगर निगम प्रशासन द्वारा दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि समाप्त करने के फैसले की कड़ी आलोचना की और इसे मजदूर विरोधी कदम बताया।

उनका कहना है कि नगर निगम ने दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि की जगह तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा की है, जिससे हर कर्मचारी को भविष्य में हर महीने लगभग 700 से 1000 रुपये तक का नुकसान होगा। उनका कहना है कि तीन प्रतिशत डीए वेतन वृद्धि के अतिरिक्त दिया जाना चाहिए था, न कि उसके बदले में।

बैठक में नगर निगम प्रशासन पर सैहब कर्मियों के साथ अन्याय करने का आरोप भी लगाया गया। यूनियन नेताओं ने कहा कि शहर में कूड़ा शुल्क, पानी और प्रॉपर्टी टैक्स हर साल बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन सफाई का कठिन काम करने वाले कर्मचारियों को उसका लाभ नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सैहब कर्मियों पर काम का बोझ कई गुना बढ़ गया है। पहले एक कर्मचारी के जिम्मे 80 घर होते थे, जो अब बढ़ाकर करीब 300 तक कर दिए गए हैं। इसके बावजूद कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया।

यूनियन ने नगर निगम प्रशासन पर फिजूलखर्ची के आरोप भी लगाए। नेताओं का कहना है कि क्यूआर कोड योजना पर करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि इस पैसे से 150 नए कर्मचारियों को रोजगार दिया जा सकता था और मौजूदा कर्मियों का काम का बोझ कम किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि इसी राशि से कर्मचारियों को बोनस एक्ट 1965 के तहत ज्यादा बोनस भी दिया जा सकता था।

बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि सैहब कर्मियों को कानूनी छुट्टियां, ओवरटाइम का भुगतान और अतिरिक्त काम का मेहनताना नहीं दिया जा रहा है। यूनियन नेताओं ने कहा कि नगर निगम प्रशासन श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को सैहब कर्मी बनाने का फैसला सिर्फ दिखावा है, क्योंकि उन्हें इससे कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा जब तक दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि लागू नहीं की जाती।

यूनियन ने साफ किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 15 मई से शुरू होने वाली हड़ताल को और तेज किया जाएगा, जिसका असर शिमला शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा