वरिष्ठ साहित्यकार डा. गंगाराम राजी के 36वें कहानी संग्रह का उपायुक्त ने किया विमोचन

 


मंडी, 24 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल के वरिष्ठ साहित्यकार डा. गंगाराम राजी प्रदेश में सबसे अधिक उपन्यास लिखने वाले रचनाकार ही नहीं है, अपितु कहानियों में भी पीछे नहीं हैं। शुक्रवार को एसपीयू के दीक्षारंभ समारोह के दौरान उनके 36वाें कहानी संग्रह रामप्यारी की सब्सिडी और अन्य कहानियां पुस्तक का उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने विमोचन किया। यह कहानी-संग्रह समकालीन जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं के भीतर छिपे बड़े मानवीय प्रश्नों को सामने लाता है। इसके उपरांत लेखक ने अपनी पुस्तक की समीक्षा एवं रचनात्मक दृष्टि से उसके सृजन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि अपनी यह पुस्तक कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी को समर्पित किया है। इस कहानी संग्रह को लेकर कविआलोचक डा. विजय विशाल ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि गंगाराम राजी की कहानियां किसी कृत्रिम वैचारिक आग्रह से नहीं, बल्कि जीवन के सीधे अनुभवों से जन्म लेती हैं। संग्रह में शामिल कहानियाँ परिवार, सामाजिक संबंधों, बदलते जीवन-मूल्यों, तकनीक, अंधविश्वास, बुज़ुर्गों की स्थिति, मानवीय विश्वास और आत्मसम्मान जैसे अनेक विषयों को सहज भाषा और रोचक कथानकों के माध्यम से प्रस्तुत करती हैं। संग्रह में हैपी मैरिज एनिवर्सरी गोपाल, भरोसा, वशीकरण मंत्र की खोज, बहादुर पिता, तलाश, होम स्टे, काली रात, अपने तेरह दिन मुझे दे दो, एआई और शीर्षक कहानी रामप्यारी की सब्सिडी जैसी रचनाएं शामिल हैं।

राजी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे साधारण जीवन के भीतर असाधारण संवेदनाएं खोज लेते हैं। उनकी कहानियों के पात्र हमारे आसपास के लोग हैं—सेवानिवृत्त कर्मचारी, शिक्षक, किसान, सैनिक, गृहिणी, बुज़ुर्ग, छोटे व्यापारी और आम नागरिक। इसलिए पाठक को इन कहानियों में अपना ही समाज दिखाई देता है। लेखक पात्रों के दुख-सुख को बिना किसी बनावटी भावुकता के प्रस्तुत करते हैं, जिससे कहानियाँ सहज रूप से पाठक के मन को छू लेती हैं। भाषा की दृष्टि से यह संग्रह अत्यंत सरल, सहज और संवादप्रधान है। कहीं-कहीं स्थानीय बोलियों और लोक-प्रयोगों का प्रयोग कहानियों को अधिक जीवंत बना देता है। लेखक अनावश्यक अलंकारों या कठिन शब्दों का सहारा नहीं लेते।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा