विद्यार्थियों को जीवंत इतिहास से साक्षात्कार कराते हैं ऐसे शैक्षणिक भ्रमण : आचार्य ललित अवस्थी

 


मंडी, 07 अप्रैल (हि.स.)। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के इतिहास विभाग द्वारा समझौता ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित संकाय–विद्यार्थी सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम के तहत 31 सदस्यीय दल जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर से सफलतापूर्वक लौटकर मंडी पहुंचा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने दल का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अत्यंत सहायक होते हैं।

उन्होंने कहा कि समकालीन उच्च शिक्षा के परिप्रेक्ष्य में ज्ञान की वास्तविक सार्थकता तभी सुनिश्चित होती है, जब वह कक्षाओं की सीमाओं से परे जाकर प्रत्यक्ष अनुभव, संवाद और अंतःसंस्थागत सहभागिता के माध्यम से विकसित हो। इतिहास जैसे अनुशासन में, जहाँ अतीत की व्याख्या केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं अपितु स्थलों, अभिलेखों, स्थापत्य एवं सांस्कृतिक परम्पराओं में निहित होती है, ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को जीवंत इतिहास से साक्षात्कार कराते हैं।

जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के साथ स्थापित यह सहयोगात्मक मंच भारतीय उच्च शिक्षा में ज्ञान-साझेदारी की उत्कृष्ट मिसाल है, जो राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक संवाद और बौद्धिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अनुभवों को शोध एवं अध्ययन में उपयोग करने का मार्गदर्शन दिया।

कार्यक्रम के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने भ्रमण की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस शैक्षणिक यात्रा के दौरान विद्यार्थियों ने जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संस्थानों का अवलोकन किया। इनमें प्रशासनिक भवन, केन्द्रीय पुस्तकालय, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम केन्द्रीय उपकरण सुविधा, अटल बिहारी वाजपेयी सभागार तथा प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला का सर मार्टिमोर व्हीलर संग्रहालय प्रमुख रहे। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को निकटवर्ती ऐतिहासिक स्थलों का भी अध्ययन कराया गया, जिनमें मितावली का चौसठ योगिनी मंदिर, पडावली, बटेश्वर मंदिर समूह, शनिचरा मंदिर, ग्वालियर किला, अशोककालीन गुर्जरा अभिलेख, सोनागिर जैन मंदिर तथा पीताम्बर पीठ शामिल हैं। इस दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न संग्रहालयों एवं सांस्कृतिक धरोहरों का प्रत्यक्ष अध्ययन कर ऐतिहासिक ज्ञान को समृद्ध किया।

भ्रमण के दौरान प्रो. शांतिदेव सिसोदिया विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला, जीवाजी विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इस भ्रमण के अंतर्गत विद्यार्थियों ने जीवाजी विश्वविद्यालय में आयोजित विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय सहभागिता की, जिससे उनके ज्ञान, संवाद क्षमता एवं सांस्कृतिक समझ का विस्तार हुआ। उन्होंने कुलगुरु जीवाजी विश्वविद्यालय के डॉ.राजकुमार आचार्य तथा प्रो. शांतिदेव सिसोदिया के प्रति सहयोग एवं व्यवस्थाओं हेतु आभार व्यक्त किया गया।

इस भ्रमण में विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा, सहायक आचार्य डॉ. रामपाल, शोधार्थी वेद प्रकाश, राहुल कुमार, डोल्मा सहित जीवाजी विश्वविद्यालय के शोधार्थी राहुल कुमार, सामिन खान, राहुल बरैया, विद्यार्थी सानू कुमार, दीपक दीपांशु, खुशबू, अनीशा, कल्पना, गौरव, उमा भारती, लखवीर, विक्रान्त एवं मनीषा सहित कुल 26 एम.ए. विद्यार्थी, 3 शोधार्थी एवं 2 संकाय सदस्य सम्मिलित रहे। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा