एसपीयू में राष्ट्रीय परिसंवाद, देश भर के विद्वानों ने सरदार पटेल के राष्ट्र निर्माण दर्शन पर किया मंथन

 




मंडी, 31 अक्टूबर (हि.स.)। सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी द्वारा सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में सरदार वल्लभ भाई पटेल का राष्ट्र निर्माण दर्शन : राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं विकसित भारत @2047 के संदर्भ में विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य ललित कुमार अवस्थी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान, नेरी (हमीरपुर) के निदेशक डॉ. चेत राम गर्ग ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। जबकि इंदिरा गांधी कला केंद्र, नई दिल्ली संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के बृहत्तर भारत अध्ययन विभाग के प्रोफेसर आचार्य धर्मचंद चौबे मुख्य वक्ता तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त

विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय केंद्र शिमला के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. जोगेन्द्र कुमार यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण आचार्य राजेश कुमार शर्मा तथा कुलसचिव शशि पाल नेगी भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय परिसर में सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा कुलगुरु द्वारा राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाने के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों ने सभागार में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मंच पर दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदे मातरम् के साथ औपचारिक कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।अधिष्ठाता छात्र कल्याण आचार्य राजेश कुमार शर्मा ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आर्थिक प्रगति के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समावेश और युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए विद्यार्थियों से सरदार पटेल के जीवन से दृढ़ संकल्प, संगठनात्मक शक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता आचार्य धर्मचंद चौबे ने अपने बीज वक्तव्य में सरदार वल्लभभाई पटेल के व्यक्तित्व, कृतित्व, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान तथा देशी रियासतों के एकीकरण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति, संगठन क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण ने स्वतंत्र भारत की एकता एवं अखंडता को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। उनके विचार वर्तमान भारत की राष्ट्रीय चुनौतियों और विकसित भारतके संकल्प को समझने में भी मार्गदर्शक हैं।

कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. चेत राम गर्ग ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता के महत्व को रेखांकित किया। उद्घाटन

सत्र के पश्चात आयोजित पैनलचर्चा में राजस्थान के सेवानिवृत्त आचार्य डॉ.सुरेंद्र डी.सोनी ने अध्यक्षता की।हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ.जगदीश प्रसाद ने सह-अध्यक्ष की भूमिका निभाई, जबकि सामाजिक विज्ञान अधिष्ठाता प्रो.चंद्रदीप कंवर हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की।

परिसंवाद के अंतर्गत दो तकनीकी सत्र भीआयोजित किए गए। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो.चंद्रदीप कंवर ने की तथा सह-अध्यक्ष के रूप में डॉ.राकेश कुमार शर्मा उपस्थित रहे।द्वितीय तकनीकी सत्र का आयोजन आभासी माध्यम से किया गया। इसकी अध्यक्षता डॉ.अंकुश भारद्वाज ने की तथा सह-अध्यक्ष डॉ. प्रशांत गौरव रहे। इस प्रकार परिसंवाद में कुल 42 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा