एसपीयू इतिहास विभाग द्वारा भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस आयओजित
मंडी, 14 अगस्त (हि.स.)। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के इतिहास विभाग द्वारा भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय मांडव्य परिसर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता अकादमिक मामले डॉ. पवन कुमार चंद ने की, जबकि डॉ. जय इंद्रपाल सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. धर्म चंद चौबे प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, बृहत्तर भारत एवं क्षेत्रीय अध्ययन विभाग इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार रहे। मुख्य अतिथि आचार्य ललित कुमार अवस्थी तथा अन्य प्रबुद्धजनों ने इतिहास विभाग द्वारा भारत विभाजन विभीषिका से संबंधित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
प्रदर्शनी में विभाजन के दौरान विस्थापन, मानवीय पीड़ा, सामाजिक विघटन, शरणार्थियों के पुनर्वास तथा विभाजन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं चित्रों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी ने आगंतुकों को वर्ष 1947 की उस त्रासदी के मानवीय पक्ष से परिचित करवाया, जिसने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। शुभारम्भ अवसर पर कार्यक्रम संयोजक विकेश कुमार ने अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य प्रस्तुत किए।
इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास की सबसे पीड़ादायक घटनाओं में से एक था।
मुख्य अतिथि आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन असंख्य लोगों की पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपार कष्ट सहे। उन्होंने कहा कि इतिहास को स्मरण करने का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं बल्कि अतीत की घटनाओं से सीख लेकर एक अधिक सशक्त, समरस और एकजुट भारत का निर्माण करना होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से इतिहास के प्रति वैज्ञानिक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने इतिहास विभाग द्वारा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी एवं कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को इतिहास के मानवीय पक्ष से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्य वक्ता प्रो. धर्म चंद चौबे ने आभासी माध्यम से अपन वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह दिवस केवल अतीत की एक त्रासद घटना को स्मरण करने का अवसर नहीं है बल्कि उन असंख्य लोगों के संघर्ष, पीड़ा, विस्थापन, साहस और मानवीय संवेदनाओं को स्मरण करने का अवसर है। जिन्होंने भारत विभाजन की विभीषिका को झेला। सन् 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास की सबसे पीड़ादायक घटनाओं में से एक था। आज हम उन सभी ज्ञात-अज्ञात व्यक्तियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं, जिन्होंने विभाजन की त्रासदी में अपने प्राण गंवाए, अपने परिवारों को खोया और विस्थापन का कठिन जीवन जिया। साथ ही उन लोगों के साहस और धैर्य को भी नमन करते हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपने जीवन को पुनः खड़ा किया और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा