जंजैहली की वादियों में हो रही है वैब सीरिज स्नो ब्राइड की शूटिंग
मंडी, 05 मार्च (हि.स.)। हिमाचल की खूबसूरत जंजैहली घाटी में इन दिनों कैमरा, लाईट एंड एक्शन की गूंज के बीच एक रहस्यमयी कहानी को स्क्रीन पर लाने की तैयारियां चल रही है। मुंबई के मिथकीय कहानियों के लेखक एवं निर्माता सीएल सैनी इन दिनों उतराखंड की एक लोककथा पर आधारित वैब सीरिज द स्नो ब्राइड यानि बर्फ की दुल्हन की शूटिंग कर रहे हैं। जिसमें टीवी सीरियलों के नामी कलाकार भूमिका गुरंग, दीप राज राणा, रवींद्र कुमार, ईशान के अलावा हिमाचल प्रदेश के शिमला, मंडी और कांगड़ा जिलों से कलाकार अपनी-अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
कहानी के लेखक एवं निर्माता सीएल सैनी ने बताया कि उतराखंड के जौनसार बाबर क्षेत्र में उनका बचपन गुजरा है। वहां के बुजूर्गों से उन्होने एक लोककथा सुन रखी थी। वहीं पर महिलाओं से यह भी सुन रखा था कि पहाड़िया देवता जिसे हिमाचल में नारसिंह देवता कहा जाता है, महिलाओं पर अपना प्रभाव डालता है।
उन्होंने बताया कि बहुत रिसर्च के बाद उन्होंने अपनी कहानी में यति की खोज कर यति की दुल्हन को बर्फ की दुल्हन के रूप में रेखांकित किया है। देवता की आड़ में कुछ लोग साजिश रचते हैं। इसमें पहाड़ की संस्कृति, लोक मान्यताओं और मिथकीय प्रभाव को दिखाने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि अपनी इस वैब सीरिज की शूटिंग के लिए उन्होंने जंजैहली घाटी को ही क्यों चुना इसके पीछे कई कारण है। सबसे पहले तो जिस क्षेत्र की यह कहानी है वहां की भौगोलिक संरचना, संस्कृति और लाेक जीवन की झलक जंजैहली क्षेत्र से मिलती है।
उनके आर्ट डायरेक्टर चौकस भारद्वाज जो धर्मशाला से संबंध रखने वाले हैं, ने बताया कि यहां पर पहले भी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है और लोग बहुत ही मिलनसार और सहयोगी हैं। उन्होंने मंडी के फिल्म डायरेक्टर पवन शर्मा की फिल्म ब्रीणा देखने के बाद जंजैहली में लोकेशन फाइनल की। जिस दौरान वे यहां पर आए तो यहां की वादियां बर्फ से ढकी हुई थी। मुझे स्नो ब्राइड की शूटिंग के लिए यह उपयुक्त स्थान लगा।
उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी सीएल इंटरटेनर प्राईवेट लिमिटेड के बैनर तले बन रही स्नो ब्राइड वैब सीरिज हंगामा ओटीटी प्लेटफार्म पर अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक रिलीज हो जाएगी। इसके छह एपीसोड बनाए जा रहे हैं। यह वैब सीरिज स्सपेंश और थ्रीलर से भरपूर है। जिसमें पहाड़ की संस्कृति, लोकमान्याताओं का समावेश है और सबसे बढ़कर हिमाचल के कलाकार इसमें अपनी कलाका हुनर दिखा रहे हैं। इससे पूर्व उन्होंने लड्डू गोपाल, देवो के देव, सीया के राम, विक्रम बेताल , नागिन, गणेश-कार्तिकेय आदि मिथकीय सीरियलों की पटकथा लिख चुके हैं। सहारनपुर उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले सरएल सैनी श्रीराम सेंटर दिल्ली से पास आउट हैं और पिछले पचीस सालों से पटकथा लेखन और प्रोडक्शन में सक्रीय हैं।
फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं
सीएल सैनी ने बताया कि अब तक फिल्मों में शिमला-मनाली, स्पीति और लद्दाख को ही अधिक दिखाया गया है। हिमाचल तो पूरी तरह से दिखाया ही नहीं गया है। जबकि हिमाचल की खूबसूरत वादियां ऐसी हैं कि फिल्म मेकर्स को विदेशों में जाने की जरूरत ही नहीं है। यहां की शिकारी घाटी स्वीटजरलैंड से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सहयोग करे और वन विंडो परमिशन जारी करे तो फिल्म मेकर्स को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और शूट करने में आसानी होगी। अगर फिल्म सिटी बन जाती है तो बड़े फिल्म प्रोडयूसर का काम आसान हो जाएगा। उन्हें मुंबई से ज्यादा तामझाम लाने की जरूरत नहीं पड़गी। कैमरे, लाईटस और अन्य उपकरण यहीं उपलब्ध हो जाएंगे। इसके अलावा डाटा ट्रांसफर करने में सुविधा रहेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा