महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष बना रोड़ा : प्रो. सिकंदर कुमार

 




शिमला, 18 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल से राज्यसभा सांसद प्रो. सिकंदर कुमार ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित न हो पाने को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ करने के लिए लाया गया यह महत्वपूर्ण विधेयक अपेक्षित दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित नहीं हो सका, जिससे देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है।

प्रो. सिकंदर कुमार ने शनिवार को एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि यह विधेयक केवल एक कानून नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक अहम कदम था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने तकनीकी और प्रक्रियागत मुद्दों का हवाला देकर इस बड़े बदलाव को रोकने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी 33 प्रतिशत तक सुनिश्चित करना था, ताकि नीति निर्धारण में महिलाओं की मजबूत भूमिका तय हो सके। उनके अनुसार, दशकों से लंबित इस मुद्दे को आगे बढ़ाने का साहस मोदी सरकार ने दिखाया है और बिना महिलाओं की भागीदारी के देश का समग्र विकास संभव नहीं है।

प्रो. सिकंदर कुमार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बाहर महिला सम्मान की बात करता है, लेकिन सदन के भीतर इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन नहीं कर सका। उन्होंने कहा कि मतदान के दौरान विपक्ष का रवैया निराशाजनक रहा और इससे सदन की गरिमा भी प्रभावित हुई। उनके मुताबिक विपक्ष ने वोट बैंक की राजनीति के कारण इस विधेयक का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के पारित न हो पाने से उन महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है, जो लंबे समय से राजनीति में अपनी भागीदारी बढ़ने का इंतजार कर रही थीं। उन्होंने विपक्ष के इस कदम को महिला विरोधी करार देते हुए कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे पर देशभर में जनता के बीच जाएंगे।

प्रो. सिकंदर कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार इस विषय पर पीछे हटने वाली नहीं है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण लागू कराने के लिए सरकार फिर से प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि अब यह जनता को तय करना है कि वह महिलाओं के सशक्तिकरण और विकास की राजनीति के साथ खड़ी है या फिर नकारात्मक राजनीति के साथ।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा