शिमला में फोरलेन टनल निर्माण के बीच कई मकानों में दरारें, प्रशासन ने काम रुकवाया

 


शिमला, 20 सितंबर (हि.स.)। राजधानी शिमला के संजौली स्थित शांति विहार वार्ड के समिट्री और ढींगू बावड़ी क्षेत्र में कई रिहायशी मकानों में दरारें आने के बाद फोरलेन टनल का निर्माण कार्य रोक दिया गया है। जिला प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित मकानों का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों की शिकायतें सुनीं। प्रशासन ने निर्माण कंपनी को तत्काल काम रोकने, भवनों की सुरक्षा के उपाय करने और दरारों के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच कराने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भट्टाकुफर से चलौंठी के बीच बन रही समानांतर टनलों के निर्माण से उनके मकानों में दरारें आई हैं। हालांकि, इन दरारों का कारण टनल निर्माण ही है, यह अभी किसी आधिकारिक जांच में स्थापित नहीं हुआ है।

आठ मकानों का निरीक्षण, लोगों ने सुनाई अपनी चिंता

एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी की अगुवाई में प्रशासनिक टीम ने प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। अधिकारियों ने मकान मालिकों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनीं। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र के कम से कम आठ से 10 मकानों की दीवारों, फर्श और डंगों में दरारें आई हैं, लोगों का कहना है कि निर्माण गतिविधियां शुरू होने के बाद नई दरारें दिखाई दीं और कुछ मकानों में टाइलें तथा अन्य हिस्से भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। लोगों ने आशंका जताई कि निर्माण कार्य आगे बढ़ने पर नुकसान बढ़ सकता है।

रात में कंपन और ब्लास्टिंग का आरोप, एनएचएआई ने नकारा

शांति विहार वार्ड के पार्षद विनीत शर्मा और स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि टनल निर्माण के दौरान रात में होने वाली ब्लास्टिंग या भूमिगत निर्माण गतिविधियों से मकानों में कंपन महसूस हुई और इसके बाद दरारें दिखाई दीं। पार्षद ने कहा कि निर्माण शुरू करने से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जानकारी नहीं दी गई।

पूर्व महापौर संजय चौहान ने भी कहा कि टनल के एलाइनमेंट वाले क्षेत्र में बड़ी संख्या में मकान हैं और निर्माण से पहले उनकी सुरक्षा को लेकर पर्याप्त जांच की जानी चाहिए। स्थानीय निवासी राजेंद्र जस्टा, पूनम, राजेंद्र चौहान, अंशुल चौहान और सुरजीत सिंह ने भी मकानों की सुरक्षा और दरारों के कारण की जांच की मांग की है। दूसरी ओर एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि टनल निर्माण से जुड़ी ब्लास्टिंग नवंबर 2025 में ही बंद कर दी गई थी और उसके बाद कोई ब्लास्टिंग नहीं हुई है।

कंपन मापने के उपकरण लगाए, दरारें भरने का काम शुरू

एनएचएआई के प्रोजेक्ट निदेशक आनंद कुमार दहिया ने बताया कि प्रभावित मकानों में दरारों के कारण और उनके बढ़ने की स्थिति का आकलन करने के लिए उपकरण लगाए गए हैं। क्षेत्र की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। उन्होंने कहा कि जिन मकानों में दरारें आई हैं, उनमें दरारों को भरने और जरूरी मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। एनएचएआई ने अपने बयान में कहा है कि परियोजना के दौरान निर्धारित इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं के अनुसार सावधानियां बरती गई हैं और प्रभावित स्थानों पर ग्राउटिंग, ढांचागत मजबूती, दरारों को भरने, ईंटों की मरम्मत सहित जरूरी उपाय किए गए हैं। प्राधिकरण ने कहा है कि वह परियोजना क्षेत्र की निगरानी कर रहा है और जरूरत के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

जांच रिपोर्ट के बाद तय होगा टनल निर्माण का अगला कदम

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में टनल निर्माण कार्य रोक दिया गया है और मकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ दरारों के वास्तविक कारण का पता लगाने पर जोर है। अधिकारियों के अनुसार एनएचएआई और निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों से स्थिति पर स्पष्टीकरण लिया जाएगा। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि विशेषज्ञों से क्षेत्र की तकनीकी और भूवैज्ञानिक जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक निर्माण आगे न बढ़ाया जाए। लोगों का कहना है कि टनल के आसपास करीब 250 से 300 भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता है।

शिमला शहर में बन रही 2.7 किलोमीटर लंबी टनल

शिमला में यातायात दबाव कम करने और शहर के प्रमुख हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी सुधारने के लिए भट्ठाकुफर से चलौंठी के बीच करीब 2.7 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जा रहा है। चलौंठी और लंबीधार क्षेत्र में भी कुछ छोटी टनलों का निर्माण चल रहा है। इस परियोजना के महत्व को देखते हुए निर्माण के साथ आसपास के भवनों की सुरक्षा पर भी नजर रखी जा रही है। भट्ठाकुफर और आसपास के क्षेत्रों में पहले जमीन धंसने और भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में प्रभावित मकानों में आई दरारों के मामले में टनल निर्माण के साथ क्षेत्र की भौगोलिक और जमीन की स्थिति को भी जांच के दायरे में रखा जा रहा है। प्रशासन और एनएचएआई की तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मकानों में आई दरारों के पीछे निर्माण गतिविधियों का कितना असर है और आगे टनल निर्माण किस तरह किया जाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा