शिमला में कुत्ते के हमले से दो वर्षीय बच्ची घायल, नागरिक सभा ने नगर निगम को घेरा
शिमला, 21 सितंबर (हि.स.)। राजधानी शिमला के रुलदुभट्टा वार्ड के शांकली क्षेत्र में दो वर्षीय बच्ची कुत्तों के हमले में बुरी तरह घायल हुई। मासूम रविवार शाम घर के आंगन में खेल रही थी। इसी बीच, लावारिश कुत्ते ने मासूम बच्ची पर हमला किया और घसीट कर थोड़ी दूर तक ले गया। पड़ोसियों ने कुत्ते को खदेड़ कर बच्ची को छुड़ाया। लहूलुहान हालत में बच्ची को आईजीएमसी में भर्ती किया गया है। बच्ची के मुंह, पीठ, टांगों में कई जगहों पर गहरे घाव हैं। इस घटना को लेकर शिमला नागरिक सभा ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ रोष जताया है।
सभा ने कहा कि हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई है और शहर में कुत्तों, बंदरों तथा लंगूरों की बढ़ती समस्या अब लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गई है। सभा ने नगर निगम से आवारा और आक्रामक पशुओं से निपटने के लिए तत्काल ठोस कार्रवाई करने की मांग की है।
शिमला नागरिक सभा ने दो वर्षीय घायल बच्ची का इलाज नगर निगम के खर्चे पर करवाने और उसे उचित मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही आक्रामक कुत्तों, बंदरों और लंगूरों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित शेल्टर में रखने, पैदल रास्तों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष सुरक्षा अभियान चलाने की मांग की गई है। सभा ने कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का काम प्रभावी तरीके से कराने तथा इसकी नियमित निगरानी करने को कहा है।
शिमला नागरिक सभा ने कहा कि 14 सितंबर को भी सभा ने प्रदर्शन कर नगर निगम प्रशासन का ध्यान शहर में बढ़ते कुत्तों, बंदरों और लंगूरों के आतंक की ओर खींचा था। उस समय समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई थी। सभा का आरोप है कि इसके बाद भी नगर निगम प्रशासन ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। सभा के अनुसार अब स्थिति ऐसी हो गई है कि लोगों को सड़कों के साथ अपने घरों के आसपास भी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है।
सभा ने नगर निगम द्वारा पिछले कई वर्षों से कुत्तों और बंदरों की नसबंदी के किए जा रहे दावों पर भी सवाल उठाए। उसका कहना है कि नसबंदी के बावजूद इन पशुओं की संख्या कम होती दिखाई नहीं दे रही है। सभा के अनुसार शहर में कई कुत्ते आक्रामक हो चुके हैं और इनके कारण लोगों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। उसने आक्रामक और खूंखार कुत्तों की पहचान कर उन्हें पकड़ने तथा सुरक्षित शेल्टर में रखने की व्यवस्था करने की मांग की है। इसके लिए पर्याप्त शेल्टर और निगरानी व्यवस्था विकसित करने की भी मांग की गई है।
शिमला नागरिक सभा ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े एनिमल बर्थ कंट्रोल नियम, 2023 और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की मांग की है। सभा ने कहा कि स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, अस्पतालों, मंदिरों, मस्जिदों, बस स्टैंडों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के आसपास आक्रामक कुत्तों के झुंड होने पर लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। सभा ने नगर निगम में पर्याप्त शेल्टर और एबीसी केंद्रों की व्यवस्था नहीं होने पर भी चिंता जताई है।
सभा ने सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों और बंदरों को खाना खिलाने के मामले पर भी निगरानी की मांग की है। उसका कहना है कि कुछ स्थानों पर खुले में पशुओं को खाना खिलाने से उनके झुंड जमा हो जाते हैं, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है। सभा ने ऐसे स्थानों पर नियमों के अनुसार निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा