सहारा योजना से एकल नारियों के पक्के आशियाने का सपना हुआ साकार

 


मंडी, 06 सितंबर (हि.स.)। मंडी जिला की एकल नारियों के अपने आशियाने का सपना अब साकार हुआ है। मंडी जिला के सियूंह गांव की पदमा देवी के पति का दशकों पहले देहांत हो चुका है। पदमा ने जैसे-तैसे बच्चों का पालन-पोषण तो कर लिया, लेकिन एक अदद पक्का मकान उनको नसीब नहीं हो पा रहा था। ऐसे में उनके सपनों को साकार करने में सहारा बनी राज्य सरकार की मुख्यमंत्री विधवा, एकल, निराश्रित, दिव्यांग महिला आवास योजना। योजना के तहत प्राप्त सहायता राशि से पदमा देवी के पक्के मकान का सपना पूरा हुआ है।

मनरेगा में 100 दिन का कार्य पूरा करने वाली पात्र महिलाओं को इस आवास योजना के तहत हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य कामगार कल्याण बोर्ड के माध्यम से मकान निर्माण के लिए तीन लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मंडी जिला की पधर तहसील के गांव सियूंह की पदमा देवी बताती हैं कि वर्ष 2007 में पति के निधन के बाद जब उनके बच्चे छोटे थे, तभी से परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उन्होंने खेती-बाड़ी की, घरेलू सब्जियां उगाईं और नारला में इन्हें बेचकर परिवार का गुजारा किया। इसके साथ-साथ वह मनरेगा में भी काम करती रहीं। वर्षों तक उनका परिवार कच्चे मकान में रहने को मजबूर था।

मनरेगा में काम करते हुए उन्हें आवास योजना की जानकारी मिली। कामगार कल्याण बोर्ड में आवेदन के बाद उन्हें मकान बनाने के लिए तीन लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत हुई। दो किस्तें मिलने के बाद उनके मकान का स्लैब तैयार हो चुका है। अब अंतिम किस्त मिलने पर मकान का शेष निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।

पदमा देवी कहती हैं कि जीवन के कठिन दौर में राज्य सरकार की ओर से मिली यह सहायता उनके लिए बहुत बड़ा संबल बनी है। वहीं पर पधर तहसील के ही गांव सुराहन की कुसमा देवी के पति का वर्ष 2024 में निधन हो गया था। दो बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। परिवार की जरूरतें पूरा करने के लिए कुसमा मनरेगा में कार्य करती रही हैं। वे बताती हैं कि पहले उनका मकान कच्चा था और बारिश में छत टपकने से उसमें रहना काफी कठिन था। मनरेगा में काम करने के दौरान उन्होंने कामगार कल्याण बोर्ड में आवास निर्माण के लिए आवेदन किया और उन्हें तीन लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। अब तक उन्हें दो किस्तें मिल चुकी हैं, जिससे मकान का स्लैब डाल दिया है। तीसरी किस्त के उपरांत वे शेष कार्य पूरा कर लेंगी।

जिला मंडी में इस योजना के तहत 16 एकल नारियों के लिए 3-3 लाख रुपए की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इनमें से चार महिलाओं को दो-दो किस्तें मिल चुकी हैं, जबकि 12 महिलाओं को 15 अगस्त, 2026 को पहली किस्त प्रदान की गई है। इस योजना ने इन महिलाओं के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई है और कच्चे मकान से पक्के आशियाने की ओर उनका स्वप्निल सफर अब साकार हो रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा