सड़क हादसों पर सख्त कानून की जरूरत, दुर्घटनाओं के लिए सरकार जिम्मेदार : शांता कुमार
शिमला, 08 जुलाई (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा है कि देश में तेज रफ्तार के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर सख्ती से अंकुश लगाया जाए तो हर वर्ष हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों में होने वाली मौतें सरकार के माथे पर एक कलंक हैं और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अपेक्षित गंभीरता से प्रयास नहीं किए जा रहे। उनका आरोप था कि बीते मंगलवार को खरड़ में हुए दर्दनाक हादसे के लिए भी सरकार की लापरवाही जिम्मेदार है।
शांता कुमार ने बुधवार को एक बयान में कहा कि भारत विश्व में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाओं वाला देश है, जबकि भारत में हिमाचल प्रदेश भी सड़क हादसों के मामले में चिंताजनक स्थिति में है। उन्होंने कहा कि विभिन्न जांच रिपोर्टें बताती हैं कि सड़क पर होने वाली लगभग 90 प्रतिशत दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण तेज रफ्तार है। यदि इस पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए तो सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
उन्होंने बीते मंगलवार पंजाब के खरड़ में हुए भीषण सड़क हादसे का उल्लेख करते हुए कहा कि एक तेज रफ्तार कार, आगे चल रहे कंटेनर के पीछे जा घुसी, जिससे कार सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में तीन माह पूर्व विवाह करने वाला नवविवाहित दंपती और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल थे।
उन्होंने कहा कि यातायात नियमों के अनुसार किसी भी वाहन को आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखनी चाहिए और निर्धारित गति सीमा का पालन करना चाहिए। यदि इन नियमों का पालन किया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने इस घटना को केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही से हुई हत्या करार देते हुए इसकी जिम्मेदारी सरकार पर डाली।
शांता कुमार ने सरकार को सुझाव दिया कि तेज रफ्तार और यातायात नियमों के गंभीर उल्लंघन पर कम से कम 50 हजार रुपये का जुर्माना तथा छह महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कानून का पालन तभी सुनिश्चित होता है जब उसके उल्लंघन पर कठोर दंड का भय हो। यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए तो लोग दोबारा नियम तोड़ने का साहस नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक देशों में सड़क दुर्घटनाएं इसलिए कम होती हैं क्योंकि वहां यातायात नियमों के उल्लंघन पर कठोर सजा दी जाती है। उन्होंने कहा कि सड़कों की स्थिति पहले जैसी ही है, लेकिन वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में ओवरटेक की जल्दबाजी और तेज रफ्तार लगातार जानलेवा साबित हो रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला