आरक्षण का आधार जाति नहीं, आर्थिक स्थिति होना चाहिए : शांता कुमार

 


शिमला, 07 मार्च (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पिछले लगभग 50 वर्षों में भारत की आर्थिक स्थिति में काफी बदलाव आया है। अब किसी भी जाति में सभी लोग न तो पूरी तरह अमीर हैं और न ही पूरी तरह गरीब।

उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्गों में भी कुछ प्रभावशाली लोगों ने कई बार आरक्षण का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से खुद को मजबूत बना लिया है, जबकि उसी वर्ग के कई लोग अब भी गरीब और वंचित हैं। इस विषय पर उच्चतम न्यायालय भी तीन बार यह कह चुका है कि आरक्षित वर्गों में जो लोग क्रीमी लेयर में आ गए हैं, उन्हें आरक्षण से बाहर किया जाना चाहिए।

शांता कुमार ने शनिवार को एक बयान में कहा कि भारत में विकास तो हो रहा है, लेकिन इसके साथ आर्थिक असमानता भी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व के अमीर देशों में गिना जा रहा है और अरबपतियों की संख्या के मामले में भी शीर्ष देशों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद दुनिया में सबसे अधिक गरीब लोग भी भारत में ही रहते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की असली समस्या गरीबी नहीं, बल्कि आर्थिक असमानता है। कुछ लोग लगातार बहुत अधिक अमीर हो रहे हैं, जबकि कई लोग गरीबी के कारण पीछे छूटते जा रहे हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि इस समस्या के समाधान के लिए देश में किसी भी प्रकार का आरक्षण जाति के आधार पर नहीं बल्कि केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर होना चाहिए। उनका मानना है कि अब जातिगत आरक्षण की आवश्यकता नहीं है और सरकार की सहायता का आधार केवल आर्थिक स्थिति और गरीबी होना चाहिए। इससे देश से गरीबी को तेजी से दूर किया जा सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला