जेनरिक दवाइयां लिखने का आदेश करोड़ों लोगों को देगा राहत : शांता कुमार
शिमला, 31 अक्टूबर (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि भारत में दवाइयों की कीमतों में एमआरपी के नाम पर भारी लूट हो रही है। 2,700 रुपये की दवाई 27 हजार रुपये तक में बेची जाती है। इस संबंध में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और केंद्र सरकार ने भी कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
शांता कुमार ने रविवार को एक बयान में कहा कि जब वह राज्यसभा के सदस्य थे, तब उन्हें वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। समिति में लगभग एक वर्ष तक दवाइयों की कीमतों और उपलब्धता को लेकर लगातार चर्चा हुई थी। समिति ने सरकार को दो प्रमुख सुझाव दिए थे। इनमें पहला सुझाव था कि सरकार आदेश जारी कर सभी डॉक्टरों को मरीजों की पर्ची पर केवल जेनरिक दवाइयां लिखने के लिए बाध्य करे।
उन्होंने कहा कि ब्रांडेड और जेनरिक दवाइयों की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं होता, लेकिन उनकी कीमतों में भारी अंतर होता है। भारत जेनरिक दवाइयों के उत्पादन में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है और अमेरिका सहित कई देश भारत से इनका आयात करते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैंसर की मैक्सावार ब्रांडेड दवाई की कीमत 80 हजार रुपये थी, जबकि भारतीय कंपनी द्वारा इसका जेनरिक विकल्प तैयार किए जाने के बाद इसकी कीमत घटकर छह हजार रुपये रह गई।
शांता कुमार ने कहा कि समिति ने दवाइयों की उत्पादन लागत पर कंपनियों का मुनाफा 20 प्रतिशत से अधिक नहीं रखने की सिफारिश भी की थी, लेकिन इस पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने सरकार को सभी डॉक्टरों को मरीजों के पर्चे पर केवल जेनरिक दवाइयां लिखने के निर्देश जारी करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसा आदेश जारी हुआ था, लेकिन वह कागजों तक सीमित रह गया। इस बार आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो करोड़ों लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी और इलाज काफी सस्ता हो सकेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला