2027 तक 142 अरब डॉलर की दवाओं के पेटेंट होंगे समाप्त, भारत के लिए बड़ा अवसर : शांता कुमार

 


शिमला, 22 जून (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा है कि भारत के सामने दवा उद्योग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अवसर आने वाला है, जिसका लाभ उठाकर देश में सैकड़ों नए उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं तथा लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में ठोस योजना बनाने का आग्रह किया है।

शांता कुमार ने सोमवार को एक बयान में बताया कि वर्ष 2027 के अंत तक विश्वभर में लगभग 142 अरब डॉलर मूल्य की अनेक दवाओं के पेटेंट समाप्त होने जा रहे हैं। किसी भी दवा कंपनी द्वारा लंबे शोध और भारी निवेश के बाद विकसित की गई दवा पर 20 वर्षों तक उसका पेटेंट अधिकार रहता है। इस अवधि के दौरान अन्य कंपनियां उस दवा का उत्पादन नहीं कर सकतीं और उसे ब्रांडेड दवा कहा जाता है। पेटेंट अवधि समाप्त होने के बाद अन्य कंपनियां भी उसी दवा का निर्माण कर सकती हैं, जिसे जेनरिक दवा कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि जेनरिक दवाओं के निर्माण में भारत विश्व का अग्रणी देश है और इसी कारण भारत को दुनिया की फार्मेसी भी कहा जाता है। जेनरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 से 60 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं, जबकि उनकी गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं होता। वर्तमान में भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में जेनरिक दवाओं का निर्यात करता है और अमेरिका तथा ब्रिटेन जैसे विकसित देश भी भारत से जेनरिक दवाओं का आयात करते हैं।

शांता कुमार ने कहा कि पेटेंट समाप्त होने के बाद जिन दवाओं का उत्पादन संभव होगा, उनके लिए भारत में लगभग 50 अरब डॉलर के नए जेनरिक दवा बाजार के विकसित होने का अनुमान है। इससे देश में पहले से स्थापित दवा उद्योगों का विस्तार होगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी बड़ी संख्या में दवा निर्माण इकाइयां कार्यरत हैं, जो इस अवसर का भरपूर लाभ उठा सकती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर इस संभावित 50 अरब डॉलर के बाजार का अधिकतम लाभ भारत को दिलाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करे।

शांता कुमार ने देश की जेनरिक दवा निर्माण कंपनियों से भी अपील की कि वे आने वाले इस अवसर के लिए अभी से सभी आवश्यक तैयारियां शुरू करें। साथ ही उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को पत्र लिखकर इस विषय में विशेष पहल करने और भारत को वैश्विक जेनरिक दवा बाजार में और अधिक मजबूत बनाने का आग्रह किया है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला