बेरोजगारी, गरीबी और आर्थिक असमानता युवाओं की निराशा के प्रमुख कारण : शांता कुमार

 


शिमला, 09 अक्टूबर (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने देश में बढ़ती आत्महत्याओं की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य में वर्ष 2024 के दौरान 813 आत्महत्याओं की खबर बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इनमें पढ़े-लिखे छात्रों की संख्या भी काफी अधिक बताई गई है।

शांता कुमार ने शुक्रवार काे एक बयान में कहा कि पूरे देश में आत्महत्याओं की बढ़ती घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में एक वर्ष में लगभग 1.87 लाख आत्महत्याएं हुईं, जिनमें करीब 13 हजार छात्र शामिल थे। उनके अनुसार, गरीबी, बेरोजगारी और इनके कारण पैदा होने वाली हताशा व निराशा युवाओं को मानसिक रूप से प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने गरीबी और बेरोजगारी दूर करने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं और लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। हालांकि, उनके अनुसार तेजी से बढ़ती आबादी के कारण रोजगार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

शांता कुमार ने कहा कि वर्ष 1947 में भारत की आबादी लगभग 38 करोड़ थी, जो अब बढ़कर करीब 143 करोड़ हो गई है। हर वर्ष बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में सामने आते हैं, जिससे रोजगार उपलब्ध कराने का दबाव बढ़ता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला