हिमाचल में दवा उद्योग की साख पर संकट, सैंपल फेल होने के मामलों पर सख्त कार्रवाई हाे : शांता कुमार

 




शिमला, 24 जून (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश देश के दवा उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि देश में बनने वाली लगभग 40 प्रतिशत दवाइयों का उत्पादन हिमाचल प्रदेश में होता है, जिससे लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है।

शांता कुमार ने बुधवार को एक बयान में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर जहां इस महत्वपूर्ण उद्योग के विस्तार की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर हिमाचल में निर्मित दवाइयों के सैंपल फेल होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने इसे अत्यंत गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया।

उन्होंने कहा कि किसी भी वस्तु में मिलावट अपराध है, लेकिन बीमार व्यक्तियों के उपचार के लिए उपयोग की जाने वाली दवाइयों में मिलावट या गुणवत्ता में कमी कहीं अधिक गंभीर अपराध है। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस मामले की गहन जांच कर दोषी कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की।

शांता कुमार ने कहा कि राज्य के दवा नियंत्रक डॉ. मुनीश कपूर ने सैंपल फेल होने वाली कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच महीनों में हिमाचल प्रदेश की 264 दवाइयों के नमूने गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए हैं।

उन्होंने दवा नियंत्रक से यह भी आग्रह किया कि पिछले वर्ष जिन सैकड़ों दवाइयों के नमूने फेल हुए थे, उन मामलों में संबंधित कंपनियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी भी जनता के सामने रखी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि बीमार लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की कोशिश की जा रही हो। हर वर्ष दवाइयों के सैंपल फेल होने की खबरें सामने आती हैं, लेकिन दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानकारी शायद ही कभी सार्वजनिक होती है।

शांता कुमार ने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई न होना शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने कहा कि दवा उद्योग की विश्वसनीयता बनाए रखने तथा लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सरकार को कठोर और पारदर्शी कदम उठाने चाहिए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला