बजट में विकास के नए साधनों का अभाव, जल विद्युत रॉयल्टी 30% करने की मांग: शांता कुमार

 


शिमला, 23 मार्च (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने हिमाचल प्रदेश सरकार के हालिया बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे राज्य के इतिहास में सबसे कमजोर बजटों में से एक बताया।

शांता कुमार ने सोमवार को एक बयान में कहा कि इस बजट में विकास के लिए नए संसाधन जुटाने या सरकारी खर्चों में कटौती कर वित्तीय स्थिति मजबूत करने की कोई सार्थक कोशिश नजर नहीं आती।

उन्होंने कहा कि राज्य में जल विद्युत परियोजनाओं की अपार संभावनाएं हैं और इस क्षेत्र में और अधिक योजनाएं शुरू की जा सकती हैं। शांता कुमार ने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ही जल विद्युत परियोजनाओं में 12 प्रतिशत रॉयल्टी का सिद्धांत लागू करवाया था, जिससे आज सरकार को करोड़ों रुपये की आय हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में बिजली की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं, ऐसे में पानी की रॉयल्टी भी बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि रॉयल्टी को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम 30 प्रतिशत किया जाए और इसके लिए पूरे प्रदेश को एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए।

उन्होंने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 का हवाला देते हुए कहा कि जोगिंदरनगर की शानन परियोजना पर हिमाचल का अधिकार बनता है। उनके अनुसार, इस कानून के तहत पुनर्गठन के बाद जिस राज्य में संपत्ति स्थित है, उस पर उसी राज्य का स्वामित्व होना चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस परियोजना को केंद्र सरकार से प्राप्त करने के लिए ठोस प्रयास करने की मांग की।

शांता कुमार ने सरकारी खर्चों में कटौती पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज भी मुख्यमंत्री के काफिले में कई गाड़ियां शामिल होती हैं, जबकि उनके कार्यकाल में केवल दो गाड़ियां ही चलती थीं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार योग्य लोगों की एक समिति गठित करे, जो अनावश्यक खर्चों में कटौती के उपाय सुझाए।

उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार के ठोस कदम उठाए जाएं तो छोटा सा हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भर बनकर विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला