नीट पुनर्परीक्षा में शामिल छात्रों की संख्या सार्वजनिक करे एनटीए: एसएफआई

 


शिमला, 29 जून (हि.स.)। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से मांग की है कि 21 जून को आयोजित नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों की वास्तविक संख्या और उपस्थिति का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। संगठन का कहना है कि पुनर्परीक्षा को लेकर जारी आंकड़ों में स्पष्टता नहीं है और इससे छात्रों तथा अभिभावकों के बीच कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

एसएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष कॉमरेड आदर्श एम साजी ने सोमवार को शिमला में प्रेस वार्ता में कहा कि नीट-यूजी की मूल परीक्षा में करीब 22 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। बाद में पेपर लीक के आरोपों के चलते परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को पुनर्परीक्षा आयोजित की गई। संगठन के अनुसार एनटीए ने अपने बयान में कहा है कि पुनर्परीक्षा में “20 लाख से अधिक” अभ्यर्थी शामिल हुए। एसएफआई का कहना है कि ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि लगभग दो लाख अभ्यर्थी परीक्षा में क्यों शामिल नहीं हुए और उनकी अनुपस्थिति के कारण क्या रहे।

उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा रद्द होने और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं के कारण बड़ी संख्या में छात्र मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में रहे।

एसएफआई अध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले में केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय को जवाबदेही तय करनी चाहिए। संगठन ने यह भी मांग की कि पुनर्परीक्षा के दौरान अपनाई गई व्यवस्थाओं और उपस्थिति संबंधी आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाए, जिससे सभी शंकाओं का समाधान हो सके।

उन्होंने पुनर्परीक्षा में बायोमेट्रिक प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन ने केंद्र सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि छात्रों के अधिकारों और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग करना लोकतांत्रिक अधिकार है।

एसएफआई ने बताया कि उसने नीट परीक्षा से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों की सहायता के लिए एक शिकायत प्रकोष्ठ शुरू किया है। आदर्श एम साजी के अनुसार सोमवार सुबह तक उसे 2,114 शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

एसएफआई ने कहा कि वह इन शिकायतों को कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से आगे उठाएगा तथा परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग जारी रखेगा। संगठन ने 29 जून से 4 जुलाई तक देशभर में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की भी घोषणा की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा