हिंदी देश की संपर्क भाषा के साथ-साथ राजकाज की भाषा रूप में आवश्यक: रेवती सैनी
मंडी, 15 जून (हि.स.)। सांख्याकिकी विभाग क्षेत्रीय कार्यालय शिमला एवं क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ द्वारा संयुक्त रूप से त्रैमासिक हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता उप महानिदेशक दीपक मेहरा ने की। इस अवसर पर उप निदेशक आयुषी मिश्रा, क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़, उप निदेशक अजय कुमावत, क्षेत्रीय कार्यालय शिमला, सहायक निदेशक अमित कुमार, उप क्षेत्रीय कार्यालय, मंडी सहित दोनों क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की।
इस अवसर पर कार्यशाला में जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रही। इसके अलावा सह-प्राध्यापक डॉ. होशियार सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने राजभाषा हिंदी के महत्व, सरकारी कार्यालयों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग तथा हिंदी भाषा के विकास एवं संवर्धन में सभी की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने कहा कि राजभाषा के तौर पर देश के आइ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में हिंदी भाषा का प्रचलन है। जबकि संपर्क भाषा के रूप में देश के अधिकतर राज्यों में हिंदी भाषा का उपयोग किया जाता है।
उन्होंने कहा कि 2011की जनगणना के आधार पर भारत में प्रथम भाषा के तौर पर 43.6 प्रतिशत लोग हिंदी भाषा का उपयोग करते हैं ,जबकि अंग्रेजी का 0.02प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि हमें प्रत्येक भाषा का सम्मान करना चाहिए और अधिक से अधिक भाषाएं सीखनी चाहिए। किंतु अपनी हिंदी भाषा की अधिक अधिमान देना चाहिए ।
रेवती सैनी ने कहा कि हिंदी भाषा बोलते समय किसी भी प्रकार का संकोच या हीन भावना नहीं होनी चाहिए । बल्कि गर्व होना चाहिए क्यों दुनियां में 7000से भी अधिक भाषाएं हैं और उनमें हिंदी तीसरा स्थान रखती है। इस अवसर पर दौरान उप महानिदेशक दीपक मेहरा ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राजभाषा संबंधी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने तथा कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया। वहीं पर उप निदेशक आयुषी मिश्रा एवं अजय कुमावत ने भी अपने विचार साझा करते हुए हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने तथा राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा