कुल्लू प्रसूता मृत्यु मामले में डॉक्टर के समर्थन में आया सैमडिकोट, निलंबन रद्द करने की मांग

 

शिमला, 01 जुलाई (हि.स.)। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में प्रसूता की मृत्यु के बाद संबंधित चिकित्सक के निलंबन के मामले में स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डैंटल कॉलेज टीचर्स (सैमडिकोट) डॉक्टर के समर्थन में सामने आया है। संगठन ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार पर जांच किए जाने की मांग की है। साथ ही सरकार से संबंधित चिकित्सक का निलंबन तत्काल प्रभाव से वापस लेने का आग्रह किया है।

सैमडिकोट के अध्यक्ष डॉ. बलबीर सिंह वर्मा और महासचिव डॉ. पीयूष कपिला ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर यह मामला एम्नियोटिक फ्लूइड एम्बोलिज्म जैसी अत्यंत दुर्लभ और गंभीर चिकित्सकीय जटिलता का प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं तथा सर्वोत्तम उपचार के बावजूद कई मामलों में मरीज को बचाना संभव नहीं हो पाता।

संगठन के अनुसार मामले की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति स्पष्ट करने के लिए डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम करवाने का अनुरोध किया था, लेकिन परिजनों ने इसके लिए सहमति नहीं दी।

संगठन ने कहा कि किसी भी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर होनी चाहिए। सैमडिकोट का कहना है कि जब तक विभागीय जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही प्रमाणित नहीं होती, तब तक संबंधित चिकित्सक का निलंबन उचित नहीं माना जा सकता। संगठन ने सुझाव दिया कि निष्पक्ष जांच के दौरान चिकित्सक को निलंबित करने के स्थान पर प्रशासनिक अवकाश पर रखा जा सकता है।

सैमडिकोट ने हाल के वर्षों में अस्पतालों के बाहर विरोध प्रदर्शन, भीड़ एकत्र कर चिकित्सकों पर आरोप लगाने और चिकित्सकीय मामलों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की। संगठन का कहना है कि इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं और चिकित्सकों के कार्य वातावरण को प्रभावित कर सकती हैं।

संगठन ने प्रशासन से अस्पतालों और चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी मामले में अफवाहों पर भरोसा न करें और जांच तथा वैज्ञानिक प्रक्रिया के निष्कर्षों का इंतजार करें।

सैमडिकोट ने कहा कि प्रसूता की मृत्यु के मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा