बच्चों की सुरक्षा पर डीसी सख्त, बैठक में नहीं पहुंचे कई स्कूलों के प्रधानाचार्य,रोजाना देना होगा सुरक्षा प्रमाणपत्र

 


शिमला, 29 अगस्त (हि.स.)। शिमला शहर के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में शनिवार को बचत भवन में आयोजित बैठक में कई निजी स्कूलों के प्रधानाचार्य अनुपस्थित रहे। बैठक में 28 सरकारी और निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों या प्रतिनिधियों को बुलाया गया था। स्कूलों को बैठक में शामिल होने के लिए दो बार रिमाइंडर भी भेजे गए थे। इसके बावजूद कई निजी स्कूलों के प्रधानाचार्य खुद बैठक में नहीं पहुंचे और कुछ स्कूलों ने उनकी जगह दूसरे शिक्षकों को भेजा। इस पर उपायुक्त ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर स्कूल प्रबंधन की गंभीर भागीदारी जरूरी है।

बैठक में स्कूल परिसरों की सुरक्षा, संभावित खतरों की पहचान और रोकथाम, नियमित सुरक्षा जांच तथा किसी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हर स्कूल प्रबंधन रोजाना जिला पुलिस को प्रमाण पत्र देगा कि स्कूल परिसर की सुरक्षा जांच पूरी कर ली गई है और परिसर सुरक्षित है। स्कूल शुरू होने से पहले और बंद होने के बाद सुरक्षा जांच करना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी स्कूल से सुरक्षा को लेकर कोई अफवाह या सूचना सामने आती है तो पुलिस यह भी देखेगी कि उस दिन संबंधित स्कूल प्रबंधन ने सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी किया था या नहीं।

उपायुक्त ने स्कूलों में तैनात सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी की नियमित निगरानी करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की है और इसे पूरी गंभीरता से निभाना होगा। किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। विश्वसनीय सूचना मिलने पर तत्काल निवारक और जरूरी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में जिला प्रशासन की ओर से तैयार स्कूल सुरक्षा और सुरक्षा खतरों से निपटने संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने सभी सरकारी, निजी, सरकारी सहायता प्राप्त और आवासीय स्कूलों में एसओपी को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूल परिसरों में बाउंड्री वॉल या फेंसिंग, प्रवेश और निकास की नियंत्रित व्यवस्था, विजिटर रजिस्टर, सुरक्षा गार्ड और संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।

स्कूल स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों, स्कूल बसों के चालकों, निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों और अन्य बाहरी कर्मियों के आवश्यक सत्यापन पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। बैठक में स्कूल वाहनों और चालकों के सत्यापन, सीसीटीवी सिस्टम के लिए बिजली का बैकअप, संवेदनशील क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार ड्रोन से निगरानी, स्कूल परिसरों में चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी और निर्माण श्रमिकों के सत्यापन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

उपायुक्त ने स्कूलों में नियमित सुरक्षा निरीक्षण और हर महीने सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। प्रत्येक स्कूल में सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और स्कूल सुरक्षा समितियों को सक्रिय रखने को भी कहा गया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गौरव जीत सिंह ने स्कूल प्रबंधन को संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सतर्क रहने को कहा। उन्होंने कहा कि किसी संदिग्ध व्यक्ति, वाहन या वस्तु की जानकारी मिलने पर स्कूल प्रबंधन खुद जोखिम न उठाए और तुरंत पुलिस तथा प्रशासन को सूचना दे। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि स्कूल परिसर के ऊपर कोई ड्रोन उड़ता दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी जाए। स्कूल में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा कर्मियों के माध्यम से जांच सुनिश्चित करने और किसी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा