आयोग ने की एससी विकास योजनाओं की समीक्षा, जवाब नहीं दे पाए अधिकारी
शिमला, 29 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग की जिला शिमला की समीक्षा बैठक में उस समय अधिकारियों पर सवाल उठे, जब लोक निर्माण विभाग के अधिकारी यह नहीं बता पाए कि अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत बनाई गई योजनाओं से अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को कितना लाभ मिला है। आयोग ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बैठक से पहले रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद अधिकारी पूरी जानकारी और रिकॉर्ड के साथ उपस्थित नहीं हुए। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बचत भवन शिमला में बुधवार को आयोजित इस समीक्षा बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने की। बैठक में अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम सहित अनुसूचित जाति वर्ग के लिए चल रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि कई विभागों ने रिकॉर्ड सही तरीके से तैयार नहीं रखा है। उन्होंने कहा कि अधिकारी यदि नियमित रूप से फील्ड में जाकर काम करते हैं तो योजनाओं और कार्यों का रिकॉर्ड अपने आप बेहतर तरीके से तैयार होता है। रिकॉर्ड में लापरवाही अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि प्रदेश सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से हर वर्ग के विकास के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत निराश्रित बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। कोई भी योग्य व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।
बैठक में अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत जारी बजट की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिला शिमला में वर्ष 2025-26 के दौरान इस कार्यक्रम के तहत 25 करोड़ 43 लाख रुपये जारी किए गए थे। इसमें से 31 मार्च 2026 तक 23 करोड़ 49 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जो कुल बजट का करीब 92 प्रतिशत है।
समीक्षा के दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से पूछा गया कि अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत उनके विभाग की ओर से बनाई गई ऐसी कौन-कौन सी बड़ी योजनाएं हैं, जिनसे अधिक संख्या में अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को लाभ मिला है। विभाग के अधिकारी इस संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दे पाए। आयोग ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि अपने-अपने डिवीजन में ऐसी योजनाओं की पूरी जानकारी तैयार कर रिपोर्ट भेजी जाए। बैठक में यह भी सामने आया कि लोक निर्माण विभाग ने विभागाध्यक्ष की जगह एसडीओ और सहायक अभियंता को भेजा था। आयोग के निर्देश के बाद करीब 15 मिनट में अधिशाषी अभियंता बैठक में पहुंचे। आयोग ने जिलाधीश शिमला को निर्देश दिए कि बैठक से अनुपस्थित रहे विभागाध्यक्षों से स्पष्टीकरण मांगा जाए और इसकी जानकारी आयोग को दी जाए।
आयोग के सदस्य दिग्विजय मल्होत्रा ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच निष्पक्ष तरीके से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को मामलों की जांच गंभीरता से करनी चाहिए। यदि एट्रोसिटी के तहत आरोप जांच में साबित नहीं होते हैं तो अन्य संबंधित धाराओं के तहत भी जांच की जानी चाहिए।
बैठक में बताया गया कि जिला शिमला में पंचायती राज और शहरी निकाय संस्थाओं में 265 सदस्य अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार अधिनियम, 1989 के तहत वर्ष 2023 में 24, वर्ष 2024 में 37 और वर्ष 2025 में 42 मामले दर्ज किए गए। इनमें वर्ष 2024 के तीन और वर्ष 2025 के 15 मामलों की जांच जारी है। कैंसिलेशन रिपोर्ट के तहत वर्ष 2023 में नौ, वर्ष 2024 में 14 और वर्ष 2025 में तीन मामले तैयार किए गए। पिछले तीन वर्षों में दो मामलों में आरोपी बरी हुए हैं। वर्ष 2018 से 2026 तक कुल 52 मामले जिला न्यायालय में लंबित हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा