शक्ति के बिना शांति की बात कोई नहीं सुनता : प्रताप सिंह
नालागढ़, 18 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंजेहरा खंड का विजयदशमी उत्सव रविवार को झिड़ीवाला में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व बीडीओ राजकुमार ने की, जबकि संघ के हिमाचल प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में पथ संचलन कर संगठन, अनुशासन और एकजुटता का संदेश दिया।
प्रताप सिंह ने विजयदशमी के ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शक्ति के बिना शांति की बात कोई नहीं सुनता। शस्त्र पूजन का उद्देश्य सज्जन शक्ति को संगठित और सामर्थ्यवान बनाना है, ताकि समाज में दुष्ट प्रवृत्तियां सिर न उठा सकें। शक्ति का उपयोग रक्षा के लिए होना चाहिए, आक्रमण के लिए नहीं।
उन्होंने कहा कि विजयदशमी असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और अहंकार पर विनय की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम द्वारा रावण वध, मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का मर्दन और अज्ञातवास समाप्त होने पर पांडवों द्वारा शमी वृक्ष से शस्त्र उठाने की परंपरा इस पर्व से जुड़ी है। प्राचीन काल में राजा-महाराजा इस दिन शस्त्र पूजन कर सीमोल्लंघन करते थे, जबकि किसान नई फसल का स्वागत और व्यापारी नए कार्यों का शुभारंभ करते थे।
प्रताप सिंह ने तुलसीदास की चौपाई 'विनय न मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीति। बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति॥' का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए समाज का संगठित और सामर्थ्यवान होना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपनी सामूहिक शक्ति पहचानने का आह्वान किया।
पंच परिवर्तन से आएगा सामाजिक बदलाव
उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्यों के पालन को जीवन में अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों को केवल विचारों तक सीमित रखने के बजाय दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। इससे सामाजिक एकता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूती मिलेगी।
प्रताप सिंह ने नशे, सामाजिक भेदभाव, स्वार्थ और आलस्य को समाज की प्रगति में बाधक बताते हुए इनके विरुद्ध सामूहिक प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए परिवार, युवाओं और समाज के प्रत्येक सदस्य को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला