राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव: दूसरी संध्या में एक इंस्पेक्टर से मुलाकात नाटक ने छोड़े आत्ममंथन के सवाल
मंडी, 04 अक्टूबर (हि.स.)। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से हिमाचल सांस्कृतिक शोध संस्थान एवं रंगमंडल, मंडी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव 2026 की दूसरी संध्या में अभिनव रंगमंडल, उज्जैन मध्य प्रदेश द्वारा जे. बी. प्रिस्टले के चर्चित नाटक ऐन इस्पेक्टर कॉलस का हिंदी रूपांतरण एक इंस्पेक्टर से मुलाकात प्रस्तुत किया गया। नाटक का हिंदी अनुवाद सुरेंद्र प्रतिभा शर्मा ने किया तथा निर्देशन शरद शर्मा ने किया। जे. बी. प्रिस्टले 1894–1984 द्वारा रचित यह नाटक उच्च वर्गीय समाज की जीवनशैली में छिपी स्वार्थपरक मानसिकता, सामाजिक असंवेदनशीलता और मानवीय संबंधों के विघटन को परत-दर-परत सामने लाता है।
नाटक केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि आधुनिकता और विकास की दौड़ में मनुष्य के भीतर बढ़ती आत्मकेंद्रितता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक युवती की आत्महत्या की जांच के सिलसिले में परिवार के घर पहुंचने वाला इंस्पेक्टर खन्ना धीरे-धीरे परिवार के प्रत्येक सदस्य को उसके कर्मों के कटघरे में खड़ा करता है। पूछताछ के दौरान सामने आने वाली घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के लिए केवल एक व्यक्ति जिम्मेदार होता है या फिर समाज की सामूहिक संवेदनहीनता भी उसके लिए उतनी ही उत्तरदायी होती है।
नाटक के माध्यम से यह संदेश प्रभावशाली ढंग से सामने आता है कि आधुनिकता और भौतिक विकास के साथ यदि सहयोग, संवेदना और मानवीय जिम्मेदारी समाप्त हो जाए, तो विकास का कोई भी अर्थ अधूरा रह जाता है। प्रस्तुति दर्शकों को अपने व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारियों का आत्मविश्लेषण करने के लिए प्रेरित करती है।
नाटक में मिस्टर खन्ना की भूमिका में गिरीजेश व्यास, मिसेज खन्ना की भूमिका में शीतल अरोड़ा, अशोक की भूमिका में सचिन वर्मा, शीला की भूमिका में यासमीन सिद्दीकी, विक्रम की भूमिका में सक्षम, मेरी की भूमिका में जज़ा सिद्दीकी तथा इंस्पेक्टर की भूमिका में शरद शर्मा ने प्रभावशाली अभिनय किया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से पारिवारिक तनाव, सामाजिक वर्गभेद, अपराध-बोध और मानवीय संवेदनाओं को मंच पर जीवंत किया।
प्रस्तुति के पश्चात हिमाचल सांस्कृतिक शोध संस्थान एवं रंगमंडल के अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने मध्य प्रदेश से आए अभिनव रंगमंडल, उज्जैन के सभी कलाकारों एवं तकनीकी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों को भी राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में अपनी सहभागिता के लिए धन्यवाद दिया। दूसरी संध्या की यह प्रस्तुति दर्शकों के बीच गंभीर चर्चा और आत्ममंथन का विषय बनी तथा इसने रंगमंच के माध्यम से समाज में मानवीय संवेदना, पारस्परिक सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता को रेखांकित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा