रंगमंच: प्रकृति पर मानवीय हस्तक्षेप पर स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ विजुअल आर्ट, रोहतक की बेहतरीन नाट्य प्रस्तुति

 




मंडी, 25 जून (हि.स.)। पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति पर बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप की गंभीर समस्या को लेकर स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ विजुअल आर्ट, रोहतक हरियाणा के छात्रों द्वारा इंदिरा मार्केट, मंडी के खुले मंच पर एक प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। जिसमें बॉडी मूवमेंट आधारित नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया गया।

नाटक में एक मोर के जीवन के माध्यम से प्रकृति के विनाश और जीव-जंतुओं पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। मोर, जो अपने नृत्य से वर्षा ऋतु का स्वागत करता है, बादलों को आमंत्रित करता है और प्रकृति में उल्लास तथा हरियाली का संदेश देता है, आधुनिक विकास और अंधाधुंध निर्माण कार्यों की भेंट चढ़ जाता है।

प्रस्तुति ने दर्शाया कि किस प्रकार मनुष्य की तथाकथित आधुनिक प्रगति ने जंगलों, पहाड़ों, नदियों और संपूर्ण प्राकृतिक संतुलन को क्षति पहुंचाई है। विकास के नाम पर प्रकृति का दोहन इस सीमा तक बढ़ गया है कि जीव-जंतुओं का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है। नाटक का मूल संदेश था कि जीवों का विनाश, अंततः मनुष्य का ही पतन है।

छात्रों ने अपनी सशक्त शारीरिक अभिव्यक्तियों, भाव-भंगिमाओं और गतियों के माध्यम से बिना अधिक शब्दों के एक गहरी संवेदना दर्शकों तक पहुंचाई। अरुण और यशवंत ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखा और अपनी प्रस्तुति के माध्यम से कहानी को जीवंत बना दिया। वहीं व्योम शर्मा ने संगीत संचालन द्वारा प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली स्वरूप प्रदान किया। इस आयोजन को प्रोत्साहित करने और युवा कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने में सीमा शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

हिमाचल सांस्कृतिक शोध संस्थान एवं रंगमंडल के सहयोग से आयोजित इस प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों, कला प्रेमियों और रंगकर्मियों ने खूब सराहा। युवा पीढ़ी द्वारा किए जा रहे ऐसे सार्थक और संवेदनशील प्रयास न केवल समाज को महत्वपूर्ण संदेश देते हैं, बल्कि रंगमंच की जीवंतता और प्रासंगिकता को भी बनाए रखते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा