राजीव गांधी वन संवर्धन योजना ग्रामीण महिला व युवक मंडलों के लिए आजीविका के खुले नए द्वार

 


मंडी, 12 जुलाई (हि.स.)। बदलते जलवायु परिदृश्य और पर्यावरण संरक्षण की बढ़ती आवश्यकता के बीच राजीव गांधी वन संवर्धन योजना जनभागीदारी आधारित हरित विकास का मॉडल बनकर उभरी है। जिसके तहत मंडी वन मंडल में 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 16 हजार पौधे लगाए गए हैं। यह योजना ग्रामीण महिला व युवक मंडलों के लिए आजीविका के नए द्वार खोल रही है। वन विभाग द्वारा पौधरोपण एवं संरक्षण कार्य के लिए महिला और युवक मंडलों को एक हैक्टेयर के लिए एक लाख 20 हजार रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। पौधरोपण में बान, देवदार, दाडू, कचनार, शीशम, आंवला, बेहड़ा, रीठा, जामुन और पाजा जैसी स्थानीय एवं बहुपयोगी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई। इन पौधों का वितरण मंडी जिला के कोटली, कटौला, मंडी, द्रंग और पनारसा रेंज की रानी बाईं, त्वांबड़ा, कमांद, कटौला, मैंहसड़ा, कुन्नू, सरौन तथा शाला नाल नर्सरियों से किया गया। इस योजना के अंतर्गत मंडी वन मंडल में माइक्रो प्लान के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से पौधरोपण किया गया, जिससे पौधों के बेहतर विकास और दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सके।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता स्थानीय महिला मंडलों और युवक मंडलों की सक्रिय सहभागिता है। वन विभाग का मानना है कि स्थानीय समुदाय पौधरोपण के साथ-साथ उनकी नियमित देखभाल एवं संरक्षण भी प्रभावी ढंग से करेगा, जिससे पौधों के जीवित रहने की दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सहभागिता और रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर रही है।

योजना का उद्देश्य हरित आवरण बढ़ाना, वन आधारित आजीविका को सुदृढ़ करना तथा स्थानीय लोगों में वनों के प्रति स्वामित्व एवं संरक्षण की भावना विकसित करना है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 121.5 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए कार्य स्वीकृत किए गए, जिनके लिए लगभग 1 करोड़ 24 लाख 20 हजार रुपए की राशि आवंटित की गई। इस अवधि में 102.5 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया तथा लगभग एक करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय उपलब्धि अर्जित की गई। योजना के तहत 74 महिला एवं युवक मंडलों को लाभान्वित करते हुए 1,22,857 पौधे/पॉलियों का वितरण किया गया।

राजीव गांधी वन संवर्धन योजना केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, सहभागिता और स्वामित्व की भावना विकसित करने का व्यापक अभियान है। महिला मंडलों, युवक मंडलों, वन विभाग और स्थानीय समुदाय की साझेदारी इस योजना को हरित हिमाचल के निर्माण की मजबूत आधारशिला बना रही है। पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और ग्रामीण विकास को समान प्राथमिकता देने वाली यह योजना आने वाले वर्षों में प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनने की क्षमता रखती है। वन संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन एवं समावेशी विकास की दिशा में राज्य सरकार के सतत प्रयास पर्यावरणीय स्थिरता और सामुदायिक कल्याण को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा