आसमानी गर्जना, ओले और झमाझम बारिश ने बिगाड़ दिया खेल, फसलों को भी होने लगा नुक्सान,
मंडी, 04 अप्रैल (हि.स.)। मंडी में शनिवार को गरजते बादलों के बीच तेज झमाझम बारिश और बीच बीच में ओलावृष्टि ने अब खेल बिगाड़ दिया है। लोग दुखी होने लगे हैं क्योंकि बारिश का दौर थम नहीं रहा है। अब गंदम की फसल को भी बारिश से कुछ राहत चाहिए ताकि खड़ी लहलहाती फसल पकना शुरू हो जाए। अप्रैल का पहला सप्ताह चल रहा है और दूसरे सप्ताह के अंत में आमतौर पर गंदम की फसल के काटने का समय हो जाता है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से जहां खड़ी फसल खेतों में बिछ रही हैं वहीं पकने की गति भी कम हो गई है।
इसी तरह से सेब व अन्य फलों को भी आकार लेने के लिए धूप व गर्मी की जरूरत है। बीच बीच में ओले भी इन फलों के लिए कहर बन रहे हैं। ओले मटर की फसल के लिए कहर बन कर टूट रहे हैं। बारिश व बर्फबारी ने एक बार फिर से मौसम को ठंडा कर दिया है। अप्रैल में भी उंचे पहाड़ों पर बर्फ पड़ने से ठंड बढ़ गई है।
शनिवार को भी सुबह से ही आसमान में बिजली कड़क रही है, तेज बारिश बीच बीच में हो रही है। कभी कभी आसमान साफ भी हो जाता है मगर अचानक दिन में ही अंधेरा छा गया और मोटी बारिश भी होती रही। इससे जनजीवन बुरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है।
फोटोः मंडी में बारिश के बीच गंतव्य की ओर जाते लोग
गरजते बादलों के बीच तेज झमाझम बारिश और बीच बीच में ओलावृष्टि ने अब खेल बिगाड़ दिया है। लोग दुखी होने लगे हैं क्योंकि बारिश का दौर थम नहीं रहा है। अब गंदम की फसल को भी बारिश से कुछ राहत चाहिए ताकि खड़ी लहलहाती फसल पकना शुरू हो जाए।
अप्रैल का पहला सप्ताह चल रहा है और दूसरे सप्ताह के अंत में आमतौर पर गंदम की फसल के काटने का समय हो जाता है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से जहां खड़ी फसल खेतों में बिछ रही हैं वहीं पकने की गति भी कम हो गई है। इसी तरह से सेब व अन्य फलों को भी आकार लेने के लिए धूप व गर्मी की जरूरत है। बीच बीच में ओले भी इन फलों के लिए कहर बन रहे हैं। ओले मटर की फसल के लिए कहर बन कर टूट रहे हैं। बारिश व बर्फबारी ने एक बार फिर से मौसम को ठंडा कर दिया है। अप्रैल में भी उंचे पहाड़ों पर बर्फ पड़ने से ठंड बढ़ गई है।
शनिवार को भी सुबह से ही आसमान में बिजली कड़क रही है, तेज बारिश बीच बीच में हो रही है। कभी कभी आसमान साफ भी हो जाता है मगर अचानक दिन में ही अंधेरा छा गया और मोटी बारिश भी होती रही। इससे जनजीवन बुरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा