कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह के दौरे से गायब रहे 3 आला अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी, सरकार ने भेज़ा नोटिस

 




शिमला, 22 जुलाई (हि.स.)। एक तय सरकारी दौरा, सड़क परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास का कार्यक्रम, स्थानीय लोगों की मौजूदगी और मंत्री का इंतजार। लेकिन जब लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह चौपाल पहुंचे तो जिन अधिकारियों को उनके साथ होना था, वे मौके पर नहीं मिले। अब यही गैरहाजिरी तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर भारी पड़ती दिख रही है।

मंत्री की नाराजगी पर सुक्खू सरकार ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए तीनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।

लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव की ओर से जारी मेमो के अनुसार 19 जुलाई को मंत्री विक्रमादित्य सिंह का शिमला जिला के चौपाल विधानसभा क्षेत्र के मालकोट और नानहार का दौरा पहले से निर्धारित था। कार्यक्रम में विभिन्न सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास होना था। इसके अलावा मंत्री को नानहार में आयोजित पारंपरिक बिशु मेले के समापन समारोह में भी शामिल होना था।

विभाग ने मेमो में कहा है कि मंत्री के दौरे का विस्तृत कार्यक्रम 17 जुलाई को ही सभी संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया था। इसके बावजूद जिन अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी थी, वे कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचे। विभाग का कहना है कि इन अधिकारियों की उपस्थिति विकास कार्यों की जानकारी देने, परियोजनाओं की स्थिति बताने और क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों पर मंत्री को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक थी।

जिन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उनमें शिमला जोन के चीफ इंजीनियर का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे अधीक्षण अभियंता विजय चौधरी, एचपीपीडब्ल्यूडी चौथा सर्किल शिमला के अधीक्षण अभियंता दीपक राज चौहान और ठियोग मंडल के अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे सहायक अभियंता नितिन ठाकुर शामिल हैं।

तीनों अधिकारियों से पूछा गया है कि मंत्री के निर्धारित दौरे के दौरान वे मौके पर क्यों मौजूद नहीं थे। विभाग ने उन्हें तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने दौरे के दौरान फोन पर संबंधित अधिकारियों से बात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। यह बातचीत बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया।

अब इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने संकेत दिए हैं कि तय सरकारी कार्यक्रमों में लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा और अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे का फैसला किया जाएगा।

छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के बेटे हैं विक्रमादित्य सिंह

उल्लेखनीय है कि विक्रमादित्य सिंह हिमाचल प्रदेश सरकार के युवा और तेज़तर्रार मंत्रियों में गिने जाते हैं। वह प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के पुत्र हैं। उनकी माता प्रतिभा सिंह पूर्व सांसद और हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं। विक्रमादित्य सिंह लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं और मौजूदा सरकार में उन्हें पहली बार मंत्री बनने का अवसर मिला है। विभागीय कामकाज को लेकर उनके सख्त रुख की चर्चा पहले भी होती रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा