शिमला : सचिवालय के बाहर प्रदर्शनकारियों का भारी हंगामा, पुलिस ने किया वाटर कैनन का इस्तेमाल

 


शिमला, 22 अक्टूबर (हि.स.)। राजधानी शिमला में गुरुवार को राज्य सचिवालय के बाहर राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी की सवर्ण पदयात्रा के दौरान भारी हंगामा हुआ। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। स्थिति को देखते हुए सचिवालय के गेट बंद कर दिए गए। प्रदर्शन के कारण शिमला से संजौली जाने वाली सड़क पर छोटा शिमला के रास्ते वाहनों की आवाजाही बंद रही और दिनभर सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहीं।

राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी की सवर्ण पदयात्रा गुरुवार को मनाली से शिमला पहुंची थी। पार्टी के अनुसार पदयात्रा ने करीब 600 किलोमीटर का सफर तय किया। प्रदर्शनकारी सचिवालय के बाहर जुटे और यूजीसी के नियम वापस लेने तथा सामान्य वर्ग के लिए आयोग गठित करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ने पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

सचिवालय के गेट बंद, छोटा शिमला-संजौली सड़क पर यातायात प्रभावित

सचिवालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। सुरक्षा के मद्देनजर सचिवालय के गेट बंद कर दिए गए।

प्रदर्शन का असर शहर की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा। शिमला से संजौली जाने वाली सड़क पर छोटा शिमला के रास्ते वाहनों की आवाजाही बंद रही। इसके कारण सड़क पर दिनभर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहीं और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू सचिवालय में मौजूद नहीं थे। वह आज ही चंबा के दो दिवसीय दौरे पर गए हैं।

यूजीसी के नियम वापस लेने और सामान्य वर्ग आयोग की मांग

राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूमित सिंह ठाकुर और करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने प्रदर्शन के दौरान यूजीसी के नियम वापस लेने और सामान्य वर्ग के लिए आयोग गठित करने की मांग उठाई। दोनों नेताओं ने कहा कि सामान्य वर्ग से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी नाराजगी भाजपा और कांग्रेस दोनों से है।

पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने ऐसे नियम बनाए, जिनका वे विरोध कर रहे हैं। उनका कहना था कि कांग्रेस ने भी इन नियमों का विरोध नहीं किया। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और मौजूदा मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू पर भी निशाना साधा।

जाति के बजाय आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग

राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग के कई लोगों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। उन्होंने यूजीसी के नियमों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इनसे देश में हिंदुओं के बीच विभाजन बढ़ेगा। नेताओं ने मांग की कि देश में आरक्षण जाति के बजाय आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने आंदोलन जारी रखने और आने वाले समय में इसे और व्यापक बनाने की घोषणा की। उन्होंने 10 जनवरी को दिल्ली कूच करने का ऐलान भी किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा