हिमाचल में उद्योगों को अब 25 साल तक मिलेगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का सहमति प्रमाण पत्र, सरकार ने बदली व्यवस्था
शिमला, 31 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने उद्योगों को राहत देने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिलने वाले सहमति प्रमाण पत्र (कंसेंट सर्टिफिकेट) की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि अब राज्य में पंजीकृत उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एक बार सहमति प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, जिसकी वैधता उद्योग की श्रेणी के अनुसार पांच वर्ष से लेकर 25 वर्ष तक होगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से उद्योगों को बार-बार अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और कारोबार करना पहले की तुलना में आसान होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में करीब 12,500 उद्योग प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकृत हैं। अब तक इन उद्योगों को समय-समय पर सहमति प्रमाण पत्र का नवीनीकरण कराना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला राज्य में कारोबार को तेज गति देने और उद्योगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने 'स्पीड ऑफ डूईंग बिजनेस' के लक्ष्य के साथ इस नई व्यवस्था को लागू किया है। इससे 'ईज ऑफ डूईंग बिजनेस' को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब उद्यमियों को बार-बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बोर्ड ने इस संबंध में अपने अधीनस्थ कार्यालयों को भी आवश्यक अधिकार दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कुछ छोटी कमियों के कारण कई बार उद्योगों की बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हो जाती थी, जिससे उत्पादन पर असर पड़ता था। नई व्यवस्था से उद्योगों को इस तरह की परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सहमति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया का भी सरलीकरण किया है। उद्योगों को उनकी क्षमता और श्रेणी के आधार पर अलग-अलग वर्गों में रखा गया है। इसी आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने की समय सीमा तय की गई है। यदि तय समय के भीतर प्रमाण पत्र जारी नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार उद्योगों के विकास और नए निवेश को बढ़ावा देने के लिए लगातार नीतियों और नियमों को सरल बना रही है। क्षेत्रीय अधिकारियों को भी वित्तीय और नियामक अधिकार दिए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर फैसले तेजी से हो सकें।
सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था को लागू करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑनलाइन प्रणाली में भी सुधार किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में करीब 70 प्रतिशत लिपिकीय कार्य कम हो जाएगा और उपलब्ध मानव संसाधन का उपयोग अन्य जरूरी कार्यों में किया जा सकेगा। इससे उद्योगों से जुड़े मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा