हिमाचल के युवाओं को रोजगार चाहिए, लॉटरी का टिकट नहीं : राकेश जम्वाल

 




मंडी, 20 अगस्त (हि.स.)। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जम्वाल ने हिमाचल प्रदेश में करीब 25 वर्ष बाद सरकारी लॉटरी शुरू करने की तैयारी पर सुक्खू सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का यह फैसला उसकी प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर हिमाचल का युवा नशे जैसी जानलेवा बुराई से जूझ रहा है और दूसरी ओर सरकार राजस्व बढ़ाने के नाम पर युवाओं के सामने लॉटरी का रास्ता खोल रही है।

राकेश जम्वाल ने कहा कि युवाओं को रोजगार चाहिए, लॉटरी का टिकट नहीं। प्रदेश का युवा अपनी मेहनत और हुनर के दम पर आगे बढ़ना चाहता है। सरकार को उसके हाथ में रोजगार, कौशल और अवसर देने चाहिए, न कि जल्दी पैसा कमाने का शॉर्टकट दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और आर्थिक दबाव के बीच लॉटरी जैसी व्यवस्था युवाओं के एक वर्ग को आसानी से पैसा कमाने के भ्रम में फंसा सकती है।

उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार को यह बताना चाहिए कि प्रदेश में लॉटरी शुरू करने की इतनी जल्दी क्यों है? क्या सरकार की प्राथमिकता रोजगार के नए अवसर पैदा करना है या फिर सरकारी खजाने में पैसा बढ़ाने के लिए ऐसे रास्ते तलाशना है, जिनका सामाजिक प्रभाव गंभीर हो सकता है।

भाजपा मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि सरकार टेंडर में 10 करोड़ रुपये सालाना लाइसेंस फीस, न्यूनतम 6 करोड़ रुपए की गारंटीड राशि, कम से कम 2 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी और 30 करोड़ रुपए की सिक्योरिटी जैसी व्यवस्थाओं के जरिए अपने राजस्व की सुरक्षा तो सुनिश्चित कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए सरकार ने क्या इंतजाम किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि लॉटरी से हर साल कितनी आय होगी, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि समाज पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा। लॉटरी को अगर जल्दी पैसा कमाने का आसान माध्यम समझ लिया गया तो इसकी शुरुआत छोटी रकम से होकर धीरे-धीरे आदत में बदल सकती है। खासकर युवा वर्ग इसके आकर्षण में सबसे पहले आ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा