डंडे वाले हाथों में ब्रश, शिमला में पुलिस जवानों की कला प्रदर्शनी, आसिफ खान की कृतियों ने खींचा ध्यान

 


शिमला, 07 अप्रैल (हि.स.)। राजधानी शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में आयोजित हिमाचल प्रदेश पुलिस जवानों की तीन दिवसीय पेंटिंग प्रदर्शनी इन दिनों लोगों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। आम तौर पर पुलिस की पहचान खाकी वर्दी, अनुशासन और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी से जुड़ी होती है, लेकिन इस प्रदर्शनी ने पुलिस का एक संवेदनशील और रचनात्मक चेहरा भी सामने रखा है। प्रदर्शनी का उद्घाटन मंगलवार कोशिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान ने किया, जबकि इस मौके पर प्रदेश के कार्यकारी पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस प्रदर्शनी में पुलिस अधिकारियों से लेकर कांस्टेबल स्तर तक के जवानों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक पहुंच रहे हैं। खास तौर पर कांस्टेबल आरिफ़ खान की पेंटिंग्स लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

बिलासपुर जिले के झंडूता क्षेत्र के रहने वाले 27 वर्षीय आसिफ खान ने प्रदर्शनी में कई प्रभावशाली पेंटिंग्स प्रदर्शित की हैं। इनमें हिंदू देवी-देवताओं, भगवान बुद्ध और पुलिस व सेना की वर्दी में जवानों के चित्र शामिल हैं। उनकी बनाई गई कार्यकारी डीजीपी अशोक तिवारी की हूबहू पेंटिंग भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।

आसिफ खान ने खास बातचीत में बताया कि प्रदर्शनी में रखी गई उनकी पेंटिंग्स को तैयार करने में उन्हें करीब दो महीने का समय लगा। उन्होंने बताया कि वे अपने ड्यूटी समय के अनुसार खाली समय निकालकर इन चित्रों पर काम करते रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें बचपन से ही पेंटिंग का शौक रहा है और छठी कक्षा से ही वे नियमित रूप से चित्र बनाते रहे हैं। स्कूल और कॉलेज के दौरान भी उनका यह शौक जारी रहा। करीब छह वर्ष पहले पुलिस विभाग में कांस्टेबल के रूप में भर्ती होने के बाद समय की कमी जरूर हुई, लेकिन उन्होंने अपने इस शौक को कभी खत्म नहीं होने दिया। उन्होंने बताया कि यह पहली बार है जब उन्हें अपनी पेंटिंग्स को इस तरह सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला है और इसके लिए उन्होंने प्रदेश पुलिस विभाग का धन्यवाद भी जताया।

महापौर सुरेंद्र चौहान ने प्रदर्शनी में लगी पेंटिंग्स की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस का यह दूसरा चेहरा वास्तव में सुखद और प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि पुलिस जवानों ने ‘चिट्टा’ जैसे सामाजिक अभिशाप को कैनवास पर बेहद मार्मिक तरीके से उकेरा है। इसके साथ ही कई पेंटिंग्स में प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता भी स्पष्ट दिखाई देती है। महापौर ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में शिमला हाट में पुलिस कलाकारों को विशेष स्थान देने का प्रयास किया जाएगा, ताकि उनकी कला को एक स्थायी मंच मिल सके।

कार्यकारी डीजीपी अशोक तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि आम लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके भीतर भी भावनाएं और रचनात्मकता है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों से विभाग ऐसे पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहित कर रहा है, जो हैंडीक्राफ्ट, ऑयल पेंटिंग और वॉटर कलर जैसी कला विधाओं में रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कलाकार अपनी कृतियों को व्यावसायिक रूप से बेचना चाहते हैं, तो विभाग इस सुझाव पर सकारात्मक रूप से विचार करेगा और उचित निर्णय लिया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा