निगमों-बोर्डों के 6,342 वंचित पेंशनरों का मुद्दा मुख्यमंत्री से उठाएगी संयुक्त संघर्ष समिति
शिमला, 05 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश के 17 निगमों और बोर्डों के 6,342 वंचित पेंशनरों के मुद्दे को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने का फैसला किया है। समिति का कहना है कि यह मामला हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा है। इसी कारण मुख्यमंत्री से जल्द मिलने का समय मांगा जाएगा और पूरे मामले को तथ्यों के साथ उनके सामने रखा जाएगा।
रविवार को समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा की अध्यक्षता में हिमाचल प्रदेश कारपोरेट सेक्टर के अध्यक्ष देवी लाल ठाकुर के साथ एक आपात संयुक्त बैठक हुई। बैठक में समिति के मीडिया सलाहकार सैन राम नेगी और वरिष्ठ सलाहकार बुद्धि राम जस्टा भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान 17 निगमों और बोर्डों के पेंशन से वंचित कर्मचारियों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
समिति के अनुसार वर्ष 1999 की अधिसूचना के आधार पर अभी केवल 372 कर्मचारियों को ही पेंशन का लाभ मिल रहा है। समिति का कहना है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने 29 अक्टूबर 1999 को जारी अधिसूचना के तहत कर्मचारियों को पेंशन का लाभ देने का प्रावधान किया था। बाद में 2 दिसंबर 2004 को इस अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया। समिति का दावा है कि इसके बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी पेंशन के दायरे से बाहर हो गए और आज 17 निगमों तथा बोर्डों के करीब 6,342 सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशन से वंचित हैं।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री के समक्ष पूरे मामले की पृष्ठभूमि और उपलब्ध तथ्यों को रखा जाएगा। समिति का कहना है कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए सरकार से समाधान निकालने का अनुरोध किया जाएगा, जिससे प्रभावित पेंशनरों को राहत मिल सके।
संघर्ष समिति ने बैठक में प्रदेश सरकार की ओर से उसकी 14 मांगों में से 6 मांगें पूरी किए जाने पर आभार भी जताया। समिति ने उम्मीद व्यक्त की कि बाकी लंबित मांगों पर भी सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा