एरियर की अधिसूचना पर पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने उठाए सवाल, जनजागरण अभियान का ऐलान
शिमला, 22 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से एक जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को बकाया एरियर देने के आदेश जारी किए जाने के बाद पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने इस पर सवाल उठाए हैं। समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने मंगलवार को कहा कि सरकार की ओर से जारी अधिसूचना से पेंशनरों की सभी लंबित मांगों का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने इसे केवल दिखावे और सरकार की ओर से अपनी स्थिति संभालने की कोशिश बताया।
भूप राम वर्मा ने कहा कि एरियर को लेकर इस तरह के आदेश पहले भी जारी किए जा चुके हैं। उनके अनुसार मौजूदा अधिसूचना से भी कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलने वाली राशि सीमित होगी। उन्होंने कहा कि इससे श्रेणी-3 के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कुछ हजार रुपये और श्रेणी-1 व 2 के कर्मचारियों को भी सीमित राशि मिलने की बात है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के उस सवाल का जिक्र किया, जिसमें बुजुर्ग पेंशनरों के आंदोलन में शामिल होने पर सवाल उठाया गया था। वर्मा ने कहा कि जब 80 वर्ष की उम्र पार कर चुके पेंशनरों की महंगाई भत्ते की किश्तें लंबित हैं तो उनके आंदोलन में शामिल होने का कारण भी समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेंशनरों की करीब 16 मांगें हैं और सरकार के साथ बैठक में इन सभी मांगों पर चर्चा हुई थी।
वर्मा ने आरोप लगाया कि पेंशनरों के साथ बैठक के समय एरियर से संबंधित अधिसूचना पहले ही तैयार और हस्ताक्षरित थी। उन्होंने कहा कि ऐसे में बैठक में मांगों पर चर्चा का क्या मतलब रह जाता है। उन्होंने सरकार पर पेंशनरों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
समिति के अतिरिक्त महासचिव ने कहा कि पेंशनर संगठनों के साथ कर्मचारियों के संगठनों से भी बातचीत चल रही है। आने वाले समय में कर्मचारी और पेंशनर संयुक्त रूप से प्रदेशव्यापी आंदोलन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि समिति प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जनजागरण अभियान चलाएगी। इसमें किन्नौर और पांगी जैसे दूरदराज के क्षेत्र भी शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि दो अक्टूबर को ठियोग में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही ब्लॉक और पंचायत स्तर पर कमेटियां गठित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। वर्मा ने आगे जेल भरो आंदोलन की बात भी कही।
वर्मा ने पेंशनरों से जुड़ी अन्य लंबित देनदारियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि श्रेणी-1 के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की करीब 30 से 35 लाख रुपये तक की देनदारियां लंबित हैं। वहीं, श्रेणी-4 के पेंशनरों की ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण का भुगतान भी लंबित होने की शिकायतें हैं।
उन्होंने महंगाई भत्ते की लंबित किश्तों और कम्यूटेशन से जुड़ी सुविधा वापस लेने का मुद्दा भी उठाया। वर्मा ने कहा कि पेंशनरों की मांगें केवल एरियर के भुगतान तक सीमित नहीं हैं और सरकार को सभी लंबित मामलों पर स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा