पेंशन वैलिडेशन एक्ट के खिलाफ हिमाचल में पेंशनरों का प्रदर्शन

 


शिमला, 19 सितंबर (हि.स.)। केंद्र सरकार के पेंशन वैलिडेशन एक्ट, 2025 के विरोध में हिमाचल प्रदेश के पेंशनरों ने शनिवार को राजधानी शिमला में प्रदर्शन किया। राज्य एवं केंद्रीय पेंशनर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों पेंशनरों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना दिया और केंद्र सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की। पेंशनर संगठनों का कहना है कि नए प्रावधानों से पुराने पेंशनरों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

संयुक्त मोर्चा के अनुसार मार्च 2025 में पारित किए गए प्रावधानों को लेकर पेंशनरों में चिंता है। उनका कहना है कि इससे अलग-अलग समय पर सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनरों के बीच पेंशन पुनरीक्षण को लेकर अंतर पैदा हो सकता है। पेंशनर संगठनों के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनरों के लिए भविष्य के वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर पेंशन पुनरीक्षण का मुद्दा स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि ऐसे पेंशनरों को महंगाई राहत मिलती रहेगी, लेकिन पेंशन पुनरीक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी को लेकर पेंशनर संगठन कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

राज्य एवं केंद्रीय पेंशनर संयुक्त मोर्चा हिमाचल के महासचिव जगमोहन ठाकुर ने कहा कि उनकी मुख्य मांग पेंशन का पुनरीक्षण है। उन्होंने कहा कि 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के कार्यक्षेत्र में पेंशन पुनरीक्षण का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उनके अनुसार इससे पुराने पेंशनरों के सामने आर्थिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल केंद्रीय पेंशनरों तक सीमित नहीं है। राज्यों में भी वेतन और पेंशन से जुड़े मामलों में केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को आधार बनाया जाता है, इसलिए इसका असर राज्य के पेंशनरों पर भी पड़ सकता है।

ठाकुर ने कहा कि पेंशनरों की मांग नहीं मानी गई तो संगठन अपना आंदोलन आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि पेंशनर सड़क से लेकर अदालत तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। पेंशनर संगठनों की ओर से इस मुद्दे को लेकर देश के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन किए गए हैं और पेंशन पुनरीक्षण को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के दायरे में शामिल करने की मांग उठाई गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा