शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन एरियर की गणना में मनमानी पर शिक्षा विभाग सख्त

 

शिमला, 08 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन एरियर की गणना को लेकर शिक्षा विभाग ने डीडीओ यानी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने कहा है कि 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2021 तक की अवधि के एरियर की गणना प्री-रिवाइज्ड पे स्केल के आधार पर ही की जाएगी। संशोधित वेतनमान को आधार बनाकर इस अवधि के एरियर की गणना करना सरकारी निर्देशों के अनुरूप नहीं होगा।

शिक्षा निदेशालय के आदेश के अनुसार विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ डीडीओ एरियर की मांग तैयार करते समय प्री-रिवाइज्ड पे स्केल की जगह संशोधित वेतनमान को आधार बना रहे हैं। इससे एरियर की राशि अधिक बन रही है। विभाग ने ऐसे मामलों पर आपत्ति जताते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है।

राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों को संबंधित अवधि के संशोधित वेतन एरियर की 50 हजार रुपये की एक ही किस्त जारी की गई है। इसके बावजूद कुछ मामलों में संशोधित वेतनमान के आधार पर बड़ी एरियर राशि की गणना कर मांग भेजे जाने की बात सामने आई है। शिक्षा विभाग ने अब ऐसी गणना पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को अदालत के आदेश या किसी अन्य वैध कारण से 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2021 की अवधि का एरियर देना पड़ता है, तो उसकी गणना प्री-रिवाइज्ड पे स्केल के आधार पर ही की जाएगी। किसी विशेष मामले में राज्य सरकार या न्यायालय की ओर से अलग और स्पष्ट निर्देश दिए गए हों तो वह इस सामान्य व्यवस्था से अलग माना जाएगा।

एरियर की गणना को लेकर विभाग ने जांच की प्रक्रिया भी तय की है। संबंधित डीडीओ एरियर की गणना करने के बाद सीधे शिक्षा निदेशालय को मांग नहीं भेज सकेंगे। पहले जिला स्तर पर संबंधित उपनिदेशक कार्यालय में तैनात सेक्शन ऑफिसर से एरियर की गणना शीट की जांच और सत्यापन करवाना अनिवार्य होगा। सत्यापन के बाद ही एरियर की मांग निदेशालय को भेजी जा सकेगी।

शिक्षा विभाग ने सभी उपनिदेशकों और डाइट के प्रधानाचार्यों को अपने अधीन आने वाले डीडीओ और कार्यालय प्रमुखों को तत्काल इन निर्देशों की जानकारी देने को कहा है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्देशों के पालन में किसी तरह की चूक या उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा। नियमों का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा