हिमाचल में चार साल से लटकी एनटीटी के 6,297 पदों पर भर्ती
शिमला, 30 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रस्तावित 6,297 नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) पदों की भर्ती चार साल बाद भी मंजिल तक नहीं पहुंच पाई है। हजारों अभ्यर्थी साक्षात्कार दे चुके हैं, दस्तावेजों की जांच भी हुई, लेकिन एनटीटी डिप्लोमा की अवधि और उसकी मान्यता को लेकर सामने आए सवालों ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को रोक दिया। अब इसका अगला रास्ता केंद्र और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की मंजूरी से जुड़ा है।
भर्ती प्रक्रिया में 20 हजार से अधिक अभ्यर्थी साक्षात्कार दे चुके हैं।
जुलाई 2025 में साक्षात्कार पूरे होने के बाद प्रक्रिया दस्तावेजों की जांच के चरण में पहुंची थी। इसी दौरान अभ्यर्थियों के एनटीटी डिप्लोमा की मान्यता और अवधि की जांच शुरू हुई। भर्ती एजेंसी हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम ने शिक्षा विभाग से एनसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची मांगी थी। दस्तावेजों की जांच के दौरान कुछ डिप्लोमा को लेकर सवाल सामने आए और अंतिम चयन सूची जारी नहीं हो सकी।
शिक्षा विभाग की जनवरी 2026 में हुई समीक्षा में भर्ती की स्थिति और स्पष्ट हुई। करीब 10 हजार आवेदनों की जांच में केवल 87 अभ्यर्थी निर्धारित पात्रता पूरी करते पाए गए। इसके बाद 6,297 पदों की भर्ती को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार शुरू हुआ।
भर्ती में सबसे बड़ा सवाल एनटीटी डिप्लोमा की अवधि को लेकर है।
शिक्षा विभाग के अनुसार एनसीटीई के नियमों के तहत एनटीटी पद के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से दो वर्षीय डिप्लोमा जरूरी है। प्रदेश में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के पास एक वर्षीय एनटीटी डिप्लोमा है। इसी अंतर के कारण साक्षात्कार पूरा होने के बाद भी दस्तावेज सत्यापन के स्तर पर अंतिम चयन सूची तैयार नहीं हो सकी।
सरकार ने एक वर्षीय एनटीटी डिप्लोमा धारकों को मौका देने के लिए ब्रिज कोर्स का विकल्प भी देखा है।
इसके तहत अतिरिक्त प्रशिक्षण देकर एक वर्षीय डिप्लोमा को दो वर्षीय पाठ्यक्रम के अनुरूप करने की संभावना पर विचार हुआ है। यह प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों यानी डाइट के माध्यम से कराने का विकल्प भी सामने आया है। हालांकि इसके लिए केंद्र और संबंधित नियामक संस्थाओं की मंजूरी जरूरी होगी।
इसके साथ ही जेबीटी प्रशिक्षित युवाओं को एनटीटी पदों के लिए मौका देने का विकल्प भी सरकार के विचार में रहा है। इसके लिए एनसीटीई से एकमुश्त छूट लेने, डाइट के माध्यम से दो वर्षीय एनटीटी प्रशिक्षण शुरू करने और दूसरे राज्यों में अपनाए गए मॉडल का अध्ययन करने जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई है। इन विकल्पों के कानूनी पहलुओं को भी देखा जा रहा है।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने अप्रैल 2026 में कहा था कि प्री-प्राइमरी शिक्षक भर्ती के लिए एनसीटीई के नियम लागू हैं और राज्य स्तर पर इनमें बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने केंद्र से नियमों में छूट देने का मामला उठाने की बात कही थी। सरकार के अनुसार इस संबंध में अभी मंजूरी नहीं मिली है।
ऐसे में चार साल पहले शुरू हुई 6,297 एनटीटी पदों की भर्ती अब नियमों के बीच फंसी हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा