नीति आयोग की बैठक में हिमाचल के हक की पैरवी करेंगे मुख्यमंत्री सुक्खू
शिमला, 11 जून (हि.स.)। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की अहम बैठक हो रही है। देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में हिस्सा लेंगे। हिमाचल प्रदेश की ओर से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बैठक में शामिल होंगे और राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण वित्तीय मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि इस मंच पर हिमाचल की आर्थिक चुनौतियों और विशेष परिस्थितियों को लेकर सकारात्मक चर्चा होगी।
जानकारी अनुसार मुख्यमंत्री सुक्खू बैठक में सबसे पहले राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का मुद्दा उठाएंगे। राज्य सरकार का कहना है कि आरडीजी बंद होने से हिमाचल प्रदेश को हर साल करीब 6,258 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री केंद्र से आरडीजी को वर्ष 2028 तक जारी रखने या इसके स्थान पर विशेष वित्तीय पैकेज देने की मांग करेंगे। सरकार का तर्क है कि पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल की विकास और प्रशासनिक जरूरतें अन्य राज्यों से अलग हैं।
बैठक में हिमाचल के वन क्षेत्रों के संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से रखा जाएगा। प्रदेश सरकार का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण में हिमाचल का बड़ा योगदान है, इसलिए राज्य को प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रुपये का वन संरक्षण बोनस दिया जाना चाहिए। इसके अलावा वर्ष 2023 की भीषण प्राकृतिक आपदा और बाढ़ से हुए 9,042 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई के लिए लंबित केंद्रीय सहायता राशि जारी करने की मांग भी मुख्यमंत्री करेंगे।
मुख्यमंत्री भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े करीब 4,200 करोड़ रुपये के बकाया एरियर का मामला भी उठाएंगे। राज्य सरकार चाहती है कि केंद्र सरकार इस भुगतान को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित राज्यों को आवश्यक निर्देश दे।
मुख्यमंत्री के साथ बैठक में मुख्य सचिव के.के. पंत और सचिव राकेश कंवर भी मौजूद रहेंगे। पिछले वर्ष भी मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में हिमाचल के वित्तीय हितों और विशेष आवश्यकताओं का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा