शिक्षा में संस्कारों का समावेश जरूरी, शिक्षक चयन प्रक्रिया में हो सुधार : गुलाब चंद कटारिया
हमीरपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर में छठे शिक्षा महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें देश-विदेश से पहुंचे शिक्षाविदों ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने की। उन्होंने शिक्षा में संस्कारों के समावेश, शिक्षकों की भूमिका और शिक्षक चयन प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
कटारिया ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण करना भी है। शिक्षक बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके लिए शिक्षकों में प्रत्येक विद्यार्थी की विशेषताओं को समझने और उसे आगे बढ़ाने की भावना होनी चाहिए।
उन्होंने विद्या भारती के शैक्षणिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1952 में इसकी स्थापना के पीछे शिक्षा के साथ संस्कारों को जोड़ने की सोच थी। उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान और प्रतिभा के साथ भारतीय परंपराओं तथा मूल्यों से जुड़कर आगे बढ़ना जरूरी है। शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों में नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करे।
नशे की समस्या से निपटने के लिए राज्यों में समन्वय पर जोर
मीडिया से बातचीत में राज्यपाल ने नशे की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने की योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ सहित क्षेत्र के अन्य राज्यों के राज्यपालों की बैठक बुलाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बैठक में नशे से जुड़ी चुनौतियों, आपूर्ति रोकने और समाधान के उपायों पर चर्चा की जाएगी। राज्यों के आपसी सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से इस समस्या से निपटने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।
शिक्षा महाकुंभ में शिक्षाविदों ने आधुनिक शिक्षा, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर भी विचार रखे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला